हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज में नए एडमिशन पर रोक, आरिफ मसूद पर FIR का आदेश जारी 

हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधयक आरिफ मसूद पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भोपाल कमिश्नर को जारी किया है। गलत तरीके से कॉलेज संचालित करने का आरोप है।इस मामले में SIT जांच की जाएगी। 
mp high court

जबलपुर हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद (Arif Masood) को बड़ा झटका दिया है। सोमवार को फर्जी दस्तावेजों के जरिए कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने के मामले में आरिफ मसूद समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। भोपाल कमिश्नर को इस मामले में कार्रवाई करने के लिए 3 दिन का समय कोर्ट ने दिया है। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

इसके अलावा आरिफ मसूद के कॉलेज “इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज” में नए दाखिले पर भी रोक लगाई गयी है। हाई कोर्ट में मामले की एसआईटी जांच करने का आदेश भी जारी किया है। संजीव शमी के नेतृत्व में 3 सदस्यों की टीम गठित की जाएगी। 90 दिनों में जांच की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी अदालत ने दिया है।

जून में रद्द हुई थी मान्यता (MP High Court Decision)

इस कॉलेज को 2005 में अस्थायी मान्यता दी गयी थी। लेकिन फर्जी सॉल्वेंसी के कारण उच्च शिक्षा विभाग ने जून 2025 में मान्यता रद्द कर दी थी। संस्थान जरूरी कागजात और शर्तें पूरी करने में विफल रहा। विभाग ने जाँच के दौरान कई अनियमितताएँ मिली थी। जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

बता दें कि मानसून सत्र के दौरान इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा में चर्चा भी हुई थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उच्च शिक्षा मंत्री से इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज पर चल रही कार्रवाई के मामले की स्थिति पूछी थी। उन्होंने कहा सॉल्वेंसी की जांच जब कलेक्टर द्वारा की गयी, तो इसे फर्जी पाया गया। इसमें कलेक्टर से हस्ताक्षर भी फेक थे। मंत्री परमार ने यह भी बताया था कि टीएनसीपी कार्यालय में भी सॉल्वेंसी को प्रस्तुत किया गया था, जिसमें पाया गया है कॉलेज के निर्माण को अनुमति नहीं दी गयी थी।

कांग्रेस विधायक ने दी थी ये दलील 

उच्च शिक्षा विभाग के इस फैसले पर आरिफ मसूद ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने इस कार्रवाई को सही नहीं बताया था। उनका कहना था कि यह मामला पहले से हाई कोर्ट में चल रहा है। इसके अलावा कॉलेज की दो बार जाँच भी हो चुकी है। नवीनीकरण भी हुआ था। कांग्रेस विधायक ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने का दावा भी किया था। उहोनें इस मामले को सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही थी।

Manisha Kumari Pandey
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