महाराजा-राजा के मिलन पर ऐसा रहा कमलनाथ के मंत्री का रिएक्शन, देखें वीडियो

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ग्वालियर।अतुल सक्सेना।
कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह को प्रदेश कांग्रेस की टीआरपी कहा जाए तो वर्तमान समय में ये अतिशयोक्ति नहीं होगी। इन दोनों नेताओं की कोई भी गतिविधि चर्चा का विषय बन जाती है। गुना में हुई इनकी आत्मीय मुलाकात इस समय राजनैतिक गलियारों की सबसे बड़ी और चटाखेदार खबर है। हालांकि इस मुलाकात के बाद सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सुर थोड़े बदल गए हैं उनका कहना है कि दोनों हमारे वरिष्ठ नेता हैं। इनकी मुलाकात कोई पहली बार नहीं हुई है। ये कोई चर्चा का विषय नहीं है।

ग्वालियर में कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की समीक्षा बैठक में शामिल होने आये खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सुर मीडिया से बात करते समय आज बदले से थे। आम तौर पर कोई भी सिंधिया समर्थक नेता उनके अलावा किसी अन्य नेता की तारीफ करने से कतराता है और यदि पार्टी का ही कोई नेता सिंधिया के खिलाफ टिप्पणी करता है तो उसे उसी भाषा में जवाब भी देता है लेकिन सोमवार को गुना में जिस अंदाज में “महाराजा” और “राजा” का मिलन हुआ है उसके बाद से माहौल बदला सा दिख रह है। सिंधिया समर्थक कमलनाथ के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा “दोनों हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता है, दोनों की मुलाकात पहली बार नहीं हुई है। दोनों के बीच अच्छा समन्वय है, दोनो ही नेता पार्टी हित के लिए काम करते हैं। और हमारी सरकार बनने के बाद तालमेल और बढ़ा है । इसलिए इनका मिलना कोई चर्चा का विषय नहीं है”। मंत्री का ये वीडियो सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बन रहा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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