वन्य जीवों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश,5 करोड़ से अधिक के दुर्लभ जीव बरामद

वन्य जीवों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश,5 करोड़ से अधिक के दुर्लभ जीव बरामद

धार/राजेश डाबी

राजगढ़ में उस समय हड़कंप मच गया जब एक गुमशुदा व्यक्ति वन्यजीव तस्करी के आरोप में धरा गया। उज्जैन में वनविभाग व एसटीएफ ने सूचना के आधार पर संयुक्त कार्यवाही करते हुए वन्यजीव तस्करी मामले में धार जिले के एक व्यक्ति सहित 10 लोगों की दो टीम को पकड़ने में सफलता प्राप्त की है। इनमें छह पुरुष एवं चार महिलाएं शामिल है। इनके पास से 5 करोड़ से अधिक कीमत के दुर्लभ जीव बरामद किए गए हैं।

एसटीएफ एसपी गीतेश गर्ग के अनुसार पकडे गए आरोपियों से एक रेड सैंड बोआ दो मुंहा सांप जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब सवा 2 करोड़ है और सुनहरा उल्लू जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ है, बरामद किया गया है। इन दोनों की अंतरराष्ट्रीय कीमत 5 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। माना जाता है कि सुनहरा उल्लू का उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है, वहीं दो मुंहे सांप जिसका वजन करीब 6 किलो है उसका उपयोग विभिन्न प्रकार की कीमती दवाएं बनाने में किया जाता है। दोनों ही जीव दुर्लभ प्रजाति के बताए जा रहे हैं। साथ ही आरोपियों से एक कार टाटा टियागो वाहन भी जब्त किया गया है। एसटीएफ द्वारा वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपियों में एक राजगढ़ का मुकेश शिवलाल श्रीवास्तव भी है जो क्षेत्र के एक धार्मिक संस्थान से भी जुड़ा हुआ है , एवं विगत दिनों उसके परिजनों ने धार जिले के राजगढ़ थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद क्षेत्र में कई तरह की कड़ियां भी जोड़ी जा रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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