हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई रोक, फैमिली पेंशन केस में 73 साल की महिला की याचिका खारिज

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को दिए गए वित्तीय और अन्य लाभ वापस लेने संबंधी राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के तहत जारी किया गया था।
हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई रोक, फैमिली पेंशन केस में 73 साल की महिला की याचिका खारिज

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को दिए गए वित्तीय और अन्य लाभ वापस लेने संबंधी राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के तहत जारी किया गया था। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि मामले की पूरी सुनवाई होने तक यह आदेश प्रभावी नहीं होगा। अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई रोक

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जिन लाभों को वापस लिया जा रहा है, वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर मिले थे। 2 जुलाई 2024 को शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत इन्हें स्वीकृति मिली थी। लेकिन शिक्षा निदेशालय ने 17 जुलाई 2025 को नया आदेश जारी कर इन्हें रद्द कर दिया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार कानून बना सकती है, लेकिन अदालत के अंतिम फैसलों को निरस्त नहीं कर सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए इसे न्यायालय की अवमानना बताया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन दलीलों को सही मानते हुए शिक्षा निदेशक के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

इसी बीच, हिमाचल हाईकोर्ट ने 73 वर्षीय महिला निर्मला देवी को फैमिली पेंशन देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके पति की सेवा पेंशन नियमों के अनुसार पात्र नहीं थी। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियम, 1972 के नियम 26 के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी बिना अनुमति इस्तीफा देता है तो उसकी पूर्व सेवा पेंशन में गिनी नहीं जाती। चूंकि निर्मला देवी के पति बिहारी लाल डोगरा ने बीएसएफ से इस्तीफा देकर बाद में सीआईएसएफ में नई भर्ती के तौर पर ज्वाइन किया था, इसलिए उनकी बीएसएफ सेवा पेंशन के लिए मान्य नहीं हो सकती।

बिहारी लाल डोगरा ने 1965 से 1970 तक बीएसएफ में लगभग 4 साल 7 महीने सेवा दी और फिर इस्तीफा दे दिया। करीब डेढ़ साल बाद उन्होंने 1972 में सीआईएसएफ ज्वाइन किया और 15 साल 8 महीने सेवा देने के बाद वहां से भी इस्तीफा दे दिया। इस तरह उनके पास आवश्यक 20 वर्ष की सेवा नहीं थी, जो पेंशन के लिए अनिवार्य है। उनकी मृत्यु 2002 में हो गई थी और उनकी पत्नी ने 2018 में यानी 16 साल बाद पेंशन का दावा किया। अदालत ने याचिका को न केवल सेवा अवधि की कमी बल्कि अत्यधिक विलंब के कारण भी खारिज कर दिया।

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