हिमाचल प्रदेश पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। देहरा पुलिस जिले की एक विशेष टीम ने पंजाब और हरियाणा के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर 7 महिलाओं समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क के तार आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) से जुड़े हुए हैं, जहाँ से निसंतान दंपतियों और कमजोर गर्भवती महिलाओं की जानकारी लीक की जाती थी।
यह पूरा गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पहले निसंतान दंपतियों की पहचान करते थे और फिर जरूरतमंद व असहाय महिलाओं से संपर्क साधकर उनके नवजात शिशुओं का लाखों रुपये में सौदा करते थे।
एक छोटी सी शिकायत से खुला इतना बड़ा राज
इस बड़े नेटवर्क का खुलासा एक सामान्य धोखाधड़ी की शिकायत से हुआ। पुलिस के अनुसार, इसी साल 17 फरवरी को संसारपुर टैरेस पुलिस थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बच्चा गोद दिलाने के नाम पर उसके साथ 23,500 रुपये की ठगी हुई है। शिकायत मिलने के बाद देहरा साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की और मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू किया।
जांच के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले मुख्य एजेंट दीपक आनंद को जालंधर, पंजाब से गिरफ्तार किया। कांगड़ा का रहने वाला दीपक ही हिमाचल के इच्छुक दंपतियों को पंजाब में सक्रिय गिरोह से जोड़ने का काम करता था। उसकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें एक-एक कर खुलने लगीं।
₹4.85 लाख में बिका बच्चा बरामद, IVF क्लीनिक की भूमिका शक के घेरे में
पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान एक नवजात शिशु को भी सकुशल बरामद किया है, जिसे गिरोह ने 4.85 लाख रुपये में बेच दिया था। बच्चे को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश पर एक विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी को सौंप दिया गया है।
एसपी देहरा मयंक चौधरी ने बताया कि यह सिर्फ ठगी का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है।
“यह केवल ठगी का नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय शिशु तस्करी नेटवर्क का मामला है। इसमें कई संस्थाएं और अस्पतालों के भी शामिल होने का शक है। गिरोह के सभी सदस्यों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।” — मयंक चौधरी, एसपी देहरा
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार की गई कई महिलाओं का संबंध IVF क्लीनिकों और NGO से रहा है। वे इन्हीं जगहों से संवेदनशील जानकारी जुटाती थीं कि कौन सा दंपति संतान के लिए परेशान है और कौन सी महिला अपने बच्चे को सौंपने की स्थिति में है। इसी जानकारी का दुरुपयोग कर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था।
पंजाब-हरियाणा में एक हफ्ते चली ताबड़तोड़ छापेमारी
इस गिरोह को पकड़ने के लिए देहरा पुलिस की टीम ने पिछले एक सप्ताह में पंजाब और हरियाणा के जालंधर, बठिंडा, मानसा और सिरसा जैसे इलाकों में लगातार दबिश दी। सोमवार को छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
हाल ही में गिरफ्तार आरोपी:
- नीलम सिंह (54 वर्ष) – बठिंडा, पंजाब
- रिम्पी (38 वर्ष) – बठिंडा, पंजाब
- किरण उर्फ काली (30 वर्ष) – सिरसा, हरियाणा
- जसमेल कौर उर्फ भोलो (60 वर्ष) – बठिंडा, पंजाब
- कुलविंदर उर्फ राजू (45 वर्ष) – जालंधर, पंजाब
- करमजीत कौर उर्फ काले (34 वर्ष) – बठिंडा, पंजाब
पहले गिरफ्तार हुए आरोपी:
- दीपक आनंद (40 वर्ष) – कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश (मुख्य एजेंट)
- मनिंद्रजीत कौर उर्फ रितु (47 वर्ष) – बटाला, पंजाब
- अनीता उर्फ आशा (59 वर्ष) – जालंधर, पंजाब
पुलिस का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।






