
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को नई दिल्ली में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगड़िया से मुलाकात कर राज्य की वित्तीय स्थिति और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल को गहरी चोट दी है, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ और अनगिनत लोगों की जान गई। सीएम ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी जुलाई 2025 में टिप्पणी कर चुका है कि पर्यावरण से समझौता करके राजस्व अर्जित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे पूरे प्रदेश को भारी हानि उठानी पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की राजस्व वृद्धि की सीमाएं हैं, फिर भी सरकार को संवैधानिक दायित्वों के तहत आवश्यक जन सेवाएं देनी पड़ती हैं।
मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग से आग्रह किया कि हिमाचल जैसे राजस्व घाटे वाले राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ज्ञापन और अतिरिक्त ज्ञापन के जरिए आयोग के सामने यह मांग रखी है कि आरडीजी को कम नहीं किया जाए और इसे राज्य की वास्तविक आय-व्यय स्थिति के आधार पर तय किया जाए। उन्होंने न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष आरडीजी निर्धारित करने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि हिमाचल के जंगलों और पर्यावरणीय कारकों को अधिक महत्व दिया जाए। बर्फ से ढके ठंडे रेगिस्तानी इलाकों को भी घने जंगलों की श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की गई, ताकि राज्य के पर्यावरणीय योगदान को मान्यता मिल सके।
हिमाचल को 50 हजार करोड़ की जरूरत
सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के लिए अलग से 50,000 करोड़ रुपये सालाना का ‘ग्रीन फंड’ बनाने की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि यह फंड किसी योजना या विशेष केंद्रीय सहायता के तहत पूंजी निवेश के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इस विषय पर वे पहले ही प्रधानमंत्री से चर्चा कर चुके हैं और पत्र भी लिख चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 15वें वित्त आयोग द्वारा तैयार आपदा जोखिम सूचकांक (डीआरआई) हिमाचल की वास्तविक परिस्थितियों को नहीं दर्शाता। भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना, जंगल की आग और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी आपदाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया है, जबकि ये खतरे हिमालयी राज्यों में कहीं अधिक प्रभाव डालते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कम डीआरआई स्कोर के कारण हिमाचल को 15वें वित्त आयोग से अपेक्षित आपदा राहत नहीं मिल पाई, जबकि यहां नुकसान ज्यादा हुआ। उन्होंने मांग की कि पहाड़ी राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से डीआरआई तैयार किया जाए और उसी आधार पर विशेष फंड राज्यों को वितरित किए जाएं। सीएम सुक्खू ने 16वें वित्त आयोग से हिमाचल की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार राम सुभग सिंह भी उपस्थित थे।
