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हिमाचल की मानव विकास रिपोर्ट-2025 जारी: शिक्षा, स्वास्थ्य और हरित विकास में नई मिसाल

Written by:Neha Sharma
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट-2025 जारी की और कहा कि यह रिपोर्ट राज्य की प्रगति, लचीलेपन और लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाती है।
हिमाचल की मानव विकास रिपोर्ट-2025 जारी: शिक्षा, स्वास्थ्य और हरित विकास में नई मिसाल

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट-2025 जारी की और कहा कि यह रिपोर्ट राज्य की प्रगति, लचीलेपन और लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल का औसत मानव विकास सूचकांक (HDI) 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से कहीं अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है, जिसकी साक्षरता दर 99.30% है। शिशु मृत्यु दर घटकर 1,000 जीवित जन्मों पर 21 रह गई है, जो बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का परिणाम है। हालांकि, पिछले चार वर्षों में जलवायु परिवर्तन और आपदाओं से प्रदेश को लगभग 46 हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।

हिमाचल की मानव विकास रिपोर्ट-2025

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने न केवल सड़क, उद्योग, कृषि और बागवानी जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में निवेश किया है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, वृद्धजन देखभाल और ग्रामीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में जीवन प्रत्याशा 72 वर्ष तक पहुंच गई है और गरीबी दर घटकर 7 प्रतिशत से नीचे आ गई है। यह सब समावेशी और सतत विकास के प्रति सरकार की नीतियों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके समाधान के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल ने हमेशा पर्यावरण-अनुकूल विकास का रास्ता अपनाया है और जंगलों व नदियों के संरक्षण में अग्रणी रहा है। लेकिन, इस बार मानसून में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से प्रदेश को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

सरकार ने उठाए कई बड़े कदम

मुख्यमंत्री ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत 680 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई है, जिसके पहले चरण में ई-टैक्सी पर 50% सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, राजीव गांधी सौर ऊर्जा योजना के तहत 100 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए ब्याज सब्सिडी दी जा रही है। हिमाचल प्रदेश अब इलेक्ट्रिक वाहन नीति अपनाने वाला पहला पहाड़ी राज्य बन गया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सार्वजनिक परिवहन का पूर्ण विद्युतीकरण है।

रिपोर्ट पेश करने के दौरान यूएनडीपी की वरिष्ठ अर्थशास्त्री एमी मिश्रा और प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी ने मुख्यमंत्री के हरित बजट, जलवायु-संवेदनशील कार्यक्रमों और विकेंद्रीकृत शासन की पहलों की सराहना की। बैठक में सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल, खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, प्रमुख सचिव देवेश कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में हिमाचल का विकास मॉडल पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बनेगा।

 

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