हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपने पत्ते अब तक नहीं खोले हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी एक सोची-समझी रणनीति के तहत 5 मार्च को नामांकन दाखिल करने से कुछ घंटे पहले ही अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेगी। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कोई भी मौका देने से बचना और फरवरी 2024 जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति को रोकना है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जल्द ही दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान से इस मुद्दे पर अंतिम चर्चा करने की उम्मीद है। कांग्रेस इस बार किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है, खासकर पिछली बार के अनुभव के बाद जब बहुमत होते हुए भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
पिछली गलती से सीखा सबक
फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया था, जो हिमाचल से नहीं थे। इसे BJP ने ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का मुद्दा बना दिया। इसका फायदा उठाते हुए BJP ने हर्ष महाजन को मैदान में उतारा और कांग्रेस के 6 विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के सहारे 9 विधायक कम होने के बावजूद चुनाव जीत लिया। इस घटना ने सुक्खू सरकार पर संकट के बादल ला दिए थे। यही वजह है कि कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
कौन हैं दौड़ में शामिल?
कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार को लेकर कई नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जैसे स्थानीय और बड़े चेहरे प्रमुख हैं। इसके अलावा, एक चर्चा यह भी है कि सीएम सुक्खू स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल को राज्यसभा भेजकर कैबिनेट में एक पद खाली करना चाहते हैं, ताकि कांगड़ा के किसी वरिष्ठ विधायक को मंत्री बनाया जा सके।
इन सब के बीच हिमाचल कांग्रेस प्रभारी और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल का नाम भी सामने आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि आलाकमान उन्हें हिमाचल से मौका दे सकता है, क्योंकि महाराष्ट्र से उनका कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। हालांकि, उन्हें उम्मीदवार बनाने पर पार्टी के भीतर ‘बाहरी’ वाले मुद्दे पर फिर से असंतोष और राजनीतिक तनाव पैदा होने का खतरा है।
BJP की ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति
दूसरी ओर, BJP पूरी स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर कांग्रेस किसी बाहरी नेता को टिकट देती है, तो BJP भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। हाल ही में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में इस पर चर्चा भी हुई। हालांकि BJP के पास बहुमत से 7 विधायक कम हैं, लेकिन पिछली जीत से पार्टी के हौसले बुलंद हैं और वह कांग्रेस को कोई भी मौका देने से चूकना नहीं चाहेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दलबदल कानून के तहत कांग्रेस के छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने का फैसला भविष्य में क्रॉस-वोटिंग को रोकने में एक नजीर साबित हो सकता है। फिर भी, कांग्रेस कोई भी जोखिम लिए बिना सावधानी से आगे बढ़ रही है। चुनाव के लिए नामांकन 5 मार्च को होंगे और 16 मार्च को मतदान के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।






