हिमाचल प्रदेश में सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में एक भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। भाजपा ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर दिल्ली में हुए AI इम्पैक्ट समिट प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में बाधा डालने और आरोपियों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इशारे पर काम कर रही है और ‘देवभूमि’ को अपराधियों के लिए ‘शरणस्थली’ बना रही है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार बताया।
क्या है AI समिट से जुड़ा पूरा विवाद?
मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट ने वैश्विक मंच पर भारत का मान बढ़ाया था, जिसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी प्रतिष्ठित मंच पर यूथ कांग्रेस के नेताओं ने अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया।
ठाकुर के अनुसार, यह कृत्य राहुल और प्रियंका गांधी के निर्देश पर किया गया था। इस मामले में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज हुई और जब दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की तो कुछ आरोपी हिमाचल में आकर छिप गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों को हिमाचल सदन में शरण दी गई और कमरों की बुकिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से हुई थी, जिसे मुख्यमंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं।
संघीय ढांचे पर हमला: जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली पुलिस की टीम सबूतों के आधार पर आरोपियों को पकड़ने रोहड़ू के चांशल वैली होटल पहुंची, तो वहां से तीन लोगों—सौरभ सिंह (अमेठी), अरवाज (कानपुर) और सिद्धार्थ (मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिनका हिमाचल से कोई संबंध नहीं, वे यहां कैसे पहुंचे और किसने उन्हें सरकारी संरक्षण दिया।
“पुलिस की इस मशक्कत का एक कारण दिल्ली पुलिस द्वारा होटल के जब्त डीवीआर और दस्तावेजों को हासिल करना था क्योंकि डीवीआर से ही सभी साजिशकर्ताओं के राज खुलने का डर है। यह सब सामने आने से सरकार बेनकाब हो जाती।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
जयराम ठाकुर ने कहा कि जब दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर लौट रही थी, तो उन्हें धर्मपुर में असंवैधानिक तरीके से रोका गया। उनके खिलाफ रात में अपहरण की FIR दर्ज कर दी गई, जबकि उनके पास सभी कानूनी दस्तावेज और कोर्ट के आदेश थे। उन्होंने इसे दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने खड़ा करने और संघीय ढांचे पर सीधा आघात बताया।
राज्यपाल से उच्चस्तरीय जांच की मांग
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम की केंद्र सरकार के माध्यम से एक उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी या नेता राजनीतिक संरक्षण देने में दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कानून के शासन से जुड़ा है। इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक विनोद कुमार, बलबीर वर्मा, जीत राम कटवाल समेत कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।






