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क्यों पास नहीं हो पाया हिमाचल प्रदेश विधानसभा में धारा-118 से जुड़ा संशोधन विधेयक? जानिए वजह

Written by:Rishabh Namdev
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हिमाचल सरकार की ओर से पेश किए गए टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा-118 में संशोधन विधेयक को सदन में मंजूरी नहीं मिली। दरअसल इस संशोधन पर विपक्ष ने विरोध जताया। विपक्ष का कहना है कि इससे हिमाचल प्रदेश की जमीन बिकना शुरू हो जाएगी और प्रदेश को भारी नुकसान होगा।
क्यों पास नहीं हो पाया हिमाचल प्रदेश विधानसभा में धारा-118 से जुड़ा संशोधन विधेयक? जानिए वजह

हिमाचल प्रदेश की धर्मशाला में विधानसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया। शुक्रवार को अंतिम दिन भी बीते दो दिनों की तरह टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा 118 में संशोधन विधेयक पर चर्चा की गई। दरअसल विधानसभा में सुखविंदर सरकार ने यह विधेयक पेश किया था लेकिन इस विधेयक को मंजूरी नहीं मिली। अब इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाएगा। दरअसल इस बिल पर विपक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके चलते यह पास नहीं हो सका।

शुक्रवार को इस विधेयक पर हुई चर्चा में भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में बताया कि अगर संशोधन होता है तो बाहरी लोगों को 20 साल तक जमीन को लीज पर लेने का अधिकार मिल जाएगा और फिर प्रॉपर्टी भी महंगी हो जाएगी। दरअसल भाजपा विधायक ने बताया कि बाहर के लोग हिमाचल में आकर जमीन खरीदेंगे और प्रॉपर्टी डीलर्स की फौज हिमाचल में खड़ी हो जाएगी और इससे हिमाचल की जमीन तेज गति से बिकना शुरू हो जाएगी।

राजस्व प्राप्ति के चक्कर में प्रदेश को नुकसान होगा: रणधीर शर्मा

दरअसल शुक्रवार को हुई चर्चा में रणधीर शर्मा ने कहा कि कृषि योग्य भूमि को खरीदने की “प्रतिबद्धता” शब्द को हटाने का काम किया जा रहा है। इससे बाहरी लोगों को हिमाचल में जमीन खरीदने का रास्ता खुलेगा और राजस्व प्राप्ति के चक्कर में प्रदेश के पेड़ों के कटान को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे हिमाचल के जल संसाधन भी नष्ट हो जाएंगे और देवभूमि की सरल और समृद्ध संस्कृति उजड़ जाएगी। इसलिए इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि इन सभी प्रश्नों का उत्तर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा सदन में दिया गया। धारा 118 के संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए सीएम ने सदन में संशोधन को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा।

सरकार का मकसद क्या था?

वहीं सीएम के इस आग्रह पर स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। दरअसल सरकार का मकसद था कि धारा 118 के तहत खरीदी जमीन पर बनाए जा रहे किसी प्रोजेक्ट का काम 5 साल में 70 प्रतिशत पूरा हो जाए तो सरकार एक्सटेंशन पेनल्टी के साथ 1 साल का और वक्त देगी। विधेयक में यह प्रावधान किया जा रहा था कि 60 प्रतिशत कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियों को धारा 118 के तहत अब मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। अब लीज पर ग्रामीण इलाकों में अल्प अवधि के लिए भवन लिए जा सकेंगे और ऐसा 10 साल तक के लिए किया जा सकेगा। इतना ही नहीं निजी बिल्डरों की ओर से बनाए गए फ्लैट खरीदने की भी छूट मिलेगी। इन सभी में धारा 118 के तहत मंजूरी नहीं लेनी होगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और यह विधेयक पास नहीं हो सका।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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