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केंद्रीय बजट से हिमाचल को झटका: 40 हजार करोड़ की RDG ग्रांट खत्म, माउंटेन ट्रेल का ऐलान; कांग्रेस-BJP में घमासान

Written by:Rishabh Namdev
Published:
केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान (RDG) खत्म होने से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का झटका लगा है। सरकार ने माउंटेन ट्रेल विकसित करने की घोषणा तो की, लेकिन इसके लिए कोई बजट या समय-सीमा तय नहीं की। इस बजट को लेकर प्रदेश में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
केंद्रीय बजट से हिमाचल को झटका: 40 हजार करोड़ की RDG ग्रांट खत्म, माउंटेन ट्रेल का ऐलान; कांग्रेस-BJP में घमासान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट ने हिमाचल प्रदेश की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। राज्य को सबसे बड़ा नुकसान राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) खत्म होने से हुआ है, जिससे प्रदेश पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। बजट में हिमाचल के लिए एकमात्र घोषणा ‘माउंटेन ट्रेल’ विकसित करने की है, लेकिन इसके लिए न तो कोई बजट आवंटित किया गया और न ही कोई समय-सीमा तय की गई है।

इस बजट के बाद प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे पहाड़ी राज्यों के हितों पर कुठाराघात बताया है, जबकि भाजपा ने इसे ‘विकसित भारत’ की नींव रखने वाला ऐतिहासिक बजट करार दिया है।

सबसे बड़ा झटका: RDG ग्रांट खत्म

बजट से हिमाचल को निराशा हाथ लगने की सबसे बड़ी वजह 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद करना है। 15वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल को इस मद में 35 से 40 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली थी। यह ग्रांट छोटे और पहाड़ी राज्यों के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए दी जाती थी।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र के इस फैसले को विनाशकारी बताया है। उन्होंने हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर RDG जारी रखने, ऋण सीमा बढ़ाने और आपदा राहत पैकेज जैसी मांगें रखी थीं, लेकिन बजट में इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

“16वें वित्त आयोग में आरडीजी ग्रांट की सिफारिश न होना हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए विनाशकारी है। प्रदेश पहले ही आर्थिक संकट और आपदाओं से जूझ रहा है, ऐसे में केंद्र का यह रवैया संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है।” — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश

सीएम सुक्खू ने प्रदेश से चुने गए भाजपा सांसदों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे राज्य के हितों को केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाने में नाकाम रहे हैं।

BJP का पलटवार: यह विकसित भारत का बजट है

वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने बजट का पुरजोर बचाव किया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह बजट एनडीए सरकार की निरंतर आर्थिक नीति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्यों के टैक्स शेयर में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी और आपदा बजट में वृद्धि से हिमाचल को सीधा लाभ मिलेगा।

“बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता, बायो-फार्मा शक्ति परियोजना और कैंसर जैसी बीमारियों की दवाओं पर टैक्स में कमी जैसे फैसले आम लोगों के लिए राहत देने वाले हैं। टैक्स शेयर बढ़ने से हिमाचल को भी आर्थिक मदद मिलेगी।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने भी बजट की सराहना करते हुए इसे समाज के हर वर्ग के लिए कल्याणकारी बताया। उन्होंने कहा कि फार्मा सेक्टर और ट्रैकिंग-हाइकिंग को बढ़ावा देने के प्रावधानों से प्रदेश को फायदा होगा, क्योंकि हिमाचल पहले से ही इन क्षेत्रों में अग्रणी है।

अन्य दलों और संगठनों की प्रतिक्रिया

बजट पर अन्य दलों और विशेषज्ञ संगठनों ने भी चिंता जताई है।

सीपीआई(एम): पार्टी के राज्य सचिव संजय चौहान ने बजट को जन-विरोधी और संघीय ढांचे पर हमला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 और 2025 की आपदाओं से प्रदेश को 18 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, लेकिन केंद्र ने कोई विशेष राहत पैकेज नहीं दिया।

किसान संगठन: प्रोग्रेसिव ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने सेब आयात पर ड्यूटी में कटौती और यूरिया सब्सिडी घटाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल के बागवानों की आजीविका पर संकट बढ़ेगा।

विशेषज्ञ: चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सूद ने बजट को ‘सुरक्षित लेकिन उत्साहहीन’ बताते हुए कहा कि इसमें बेरोजगारी और निजी निवेश जैसे मुद्दों पर साहसिक फैसलों की कमी दिखी।