The Burning Car : चलती कार में लगी आग, धू-धू कर जली, खतरे में पड़ी जान

The Burning Car : चलती कार में लगी आग, धू-धू कर जली, खतरे में पड़ी जान

इटारसी, राहुल अग्रवाल| कभी कभी ऐसे हादसे हो जाते जिनकी हम कल्पना भी नही कर सकते| ऐसा ही कुछ इटारसी (Itarsi) डीजल शेड में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत संतोष निवारिया के साथ घटित हुआ| जब वो ड्यूटी खत्म कर घर जा रहे थे। तब यार्ड रोड पर पुलिस चौकी के पास उनकी हुंडई कंपनी की सेंट्रो कार में अचनाक धुंआ उठता देख गाड़ी रोकी इसके तुरंत बाद गाड़ी बर्निंग कार (Burning) बन गई|

संतोष ने कूदकर अपनी जान बचाई। गाड़ी में संभवतः शॉर्ट सर्किट (Shot Circuit) से आग लगना बताया जा रहा है। जब तक फायर ब्रिगेड पहुँची तब तक वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गया था| गनीमत रही कि कोई जनहानि नही हुई।

संतोष निवारिया ने बताया कि वह लगभग 2 बजे ड्यूटी खत्म कर अपने सोनासावरी नाका स्थित घर जा रहे थे कि तभी न्यू यार्ड पुलिस चौकी के पास कार में अचानक आग लग गई, मेरे द्वारा समय पर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई गई|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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