होशंगाबाद में बाढ़, नर्मदा ने दिखाया रौद्र रूप, सेना बुलाई, सड़क पर आया मगरमच्छ

होशंगाबाद में बाढ़, नर्मदा ने दिखाया रौद्र रूप, सेना बुलाई, सड़क पर आया मगरमच्छ

होशंगाबाद, डेस्क रिपोर्ट| प्रदेश भर में लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं| जलस्तर बढ़ने के कारण बांधों के गेट खोले गए हैं| जिसके चलते निचली बस्तियों में जलभराव हो गया है| वहीं कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं| इधर, होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिले में हो रही जोरदार बारिश के चलते नर्मदा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने सेना बुलाई है।

भारी बारिश की वजह से नर्मदा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है| बिगड़ते हालात को देखते हुआ प्रशासन की तरफ से सेना की यूनिट भी बुला ली गई है| होशंगाबाद के काले महादेव मंदिर तक नर्मदा नदी का पानी पहुंच गया है। यह मंदिर सेठानी घाट से ऊपर स्थित है, उधर पुलिस ने सेठानी घाट जाने पर रोक लगा दी है। वहीं तवा नदी भी उफान पर। नदी में पानी पुल के ऊपर बह रहा है। तवा डैम से छोड़े गए पानी की वजह से यह हालात बने हैं।

उफान पर चल रही नर्मदा का पानी बस्ती तक पहुँच गया हैं| हालात बाढ़ जैसे बन गए हैं| वहीं बाढ़ के पानी में एक मगरमच्छ रहवासी इलाके में पहुँच गया| इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, यह सेठानी घाट के पास का बताया जा रहा है| पानी में तैरते मगरमच्छ का लोगों ने वीडियो बनाया| होशंगाबाद में आज सुबह से ही बारिश हो रही है| जिसके चलते कई इलाकों में पानी भी भर गया है| बारिश के पानी को निकाला जा सके, इसलिए जिले के सभी डैम के गेट खोल दिए गए हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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