नर्मदापुरम: चार साल से बदहाल सड़क से परेशान नानपा, कुल्हड़ा और आसपास के गांवों के लोगों का सब्र अब जवाब दे गया है। शुक्रवार को ग्रामीण करीब 45 किलोमीटर पैदल चलकर नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट पहुंचे और गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी अपने साथ पांच ट्रॉलियों में खाने-पीने और सोने का सामान भी लेकर आए हैं। उनका कहना है कि जब तक सड़क को लेकर लिखित जवाब नहीं मिलता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।
ग्रामीण “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगा रहे हैं। कलेक्ट्रेट के बाहर बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने सड़क की मरम्मत शुरू करा दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे स्थायी समाधान नहीं मान रहे। उनकी मांग है कि उन्हें नई और पक्की सड़क चाहिए।
9 सितंबर से चल रहा आंदोलन, तीसरे दिन पहुंचे कलेक्ट्रेट
नानपा-कुल्हड़ा सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन 9 सितंबर से चल रहा है। पहले दिन नानपा थाने में रात करीब 11 बजे तक धरना दिया गया। अगले दिन ग्रामीण सड़क के गड्ढों में बैठकर विरोध करते रहे। तीसरे दिन शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने नानपा घाट पर नर्मदा पूजन किया और इसके बाद नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट के लिए पैदल मार्च शुरू किया। करीब 45 किलोमीटर का सफर तय कर वे शाम करीब 7 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे।
3.26 KM की सड़क, करीब 2 हजार लोगों की परेशानी
नानपा, कुल्हड़ा और आसपास के इलाकों को जोड़ने वाली सड़क की लंबाई करीब 3.26 किलोमीटर है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। बारिश में गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाता है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, मरीज, किसान और नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग गुजरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो हजार लोग पिछले चार साल से इस समस्या को झेल रहे हैं।
सड़क के रास्ते में आया अवैध रेत परिवहन का मामला
मामले में सबसे अहम पेंच सड़क निर्माण के प्रस्ताव को लेकर है। नानपा-कुल्हड़ा रोड को पक्का करने के लिए ग्रामीण विकास प्राधिकरण ने प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेजा था। 24 दिसंबर 2025 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव के सामने इसका प्रेजेंटेशन भी हुआ।
लेकिन इसी दौरान यह बात सामने आई कि इस मार्ग से बंद खदानों से बिना रॉयल्टी अवैध रेत का परिवहन किया जाता है। इसके बाद सड़क निर्माण की मंजूरी रोक दी गई। विभाग का तर्क है कि जब तक अवैध भारी वाहन इस मार्ग से चलते रहेंगे, नई सड़क बनाने का फायदा नहीं होगा क्योंकि वह दोबारा खराब हो सकती है।
ग्रामीणों का सवाल- अवैध रेत रोकना किसकी जिम्मेदारी?
यही बात अब ग्रामीणों की नाराजगी की बड़ी वजह बन गई है। उनका कहना है कि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर अवैध वाहन चल रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, इसकी कीमत गांव के लोगों को सड़क से वंचित रखकर क्यों चुकानी पड़े?
ग्रामीण अब कलेक्टर को ज्ञापन देकर सड़क को लेकर लिखित जवाब मांग रहे हैं। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट नितिन टाले, डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले, एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार सुनील शर्मा, तहसीलदार सुरेखा यादव, डीएसपी संतोष मिश्रा और कोतवाली टीआई गौरव सिंह बुंदेला सहित प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद हैं।





