इंदौर में एक बार फिर अवैध कीमती धातुओं की तस्करी का मामला सामने आया है जिसने पुलिस और टैक्स एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने मंगलवार को दिनदहाड़े 46 किलो चांदी जब्त की, जिसे बिना किसी वैध दस्तावेज के स्कूटर से ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई अन्नपूर्णा मंदिर के पास की गई जहां संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की।
इस घटना ने न सिर्फ शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि सराफा बाजार में होने वाले अवैध लेन-देन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। पुलिस अब यह जानने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी कहां से लाई गई और इसका असली मालिक कौन है।
कैसे सामने आया पूरा मामला
इंदौर में 46 किलो चांदी जब्त होने का मामला तब सामने आया जब अन्नपूर्णा थाना पुलिस को गोपनीय सूचना मिली। टीआई अजय नायर के अनुसार सूचना थी कि अन्नपूर्णा मंदिर के आसपास एक कार से कुछ लोग चांदी की सिल्लियां उतारकर स्कूटर पर रख रहे हैं। यह गतिविधि सामान्य नहीं लग रही थी इसलिए पुलिस ने बिना देरी किए मौके पर टीम रवाना की।
पुलिस टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद लोग घबरा गए। इस दौरान आरक्षक उदयसिंह और सैनिक अर्जन यादव ने स्कूटर पर सवार दो युवकों को रोक लिया। तलाशी के दौरान स्कूटर पर रखी भारी मात्रा में चांदी की सिल्लियां बरामद हुईं। जब उनका वजन कराया गया तो कुल 46 किलो चांदी पाई गई, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है।
दस्तावेज नहीं दिखा सके आरोपी
पुलिस द्वारा जब आरोपियों से चांदी से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कभी वे कागजात भूल जाने की बात कहने लगे तो कभी इधर-उधर की बातें करने लगे। उनके जवाबों में लगातार विरोधाभास दिखा जिससे पुलिस का शक और गहरा गया।
इंदौर में 46 किलो चांदी जब्त होने के बाद पुलिस ने तुरंत चांदी को जब्त कर लिया और दोनों युवकों को थाने लाकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि चांदी का परिवहन न तो जीएसटी नियमों के अनुसार था और न ही उसके पास कोई वैध बिल या रसीद मौजूद थी।
सराफा बाजार और अवैध कारोबार पर फिर उठे सवाल
इंदौर का सराफा बाजार देशभर में अपनी पहचान रखता है। यहां रोजाना करोड़ों रुपये का सोना-चांदी का कारोबार होता है। लेकिन समय-समय पर बिना बिल और बिना दस्तावेज के धातुओं की आवाजाही के मामले सामने आते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि टैक्स बचाने के लिए कई बार कीमती धातुओं का लेन-देन नकद और बिना दस्तावेज के किया जाता है।





