क्राइम पेट्रोल की अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता ने लगाई फांसी, फेसबुक पर लिखी ये आखरी लाइन

क्राइम पेट्रोल की अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता ने लगाई फांसी, फेसबुक पर लिखी ये आखरी लाइन

इंदौर।आकाश धोलपुरे

मिनी मुंबई से मुंबई की और उड़ान भरने वाली इंदौर की प्रेक्षा मेहता नामक टीवी सीरियल अभिनेत्री और यु ट्यूब सेलिब्रिटी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। दरअसल, लॉक डाउन के बाद से प्रेक्षा मेहता उम्र 25 वर्ष इंदौर में आ गई थी।वो मुंबई में टीवी सीरियल में काम करती थी , क्राइम पेट्रोल के भी कई प्रोग्राम में उसने अभिनय किया था, युवती के पिता के मुताबिक लॉक डाउन होने के पर वह घर आ गई थी, मुम्बई में जिस तरह कोरोना बढ़ता जा रहा है और लगातार लॉक डाउन होने से, युवती को लगा कि लंबे समय तक काम नही मिलेगा। जिसके चलते डिप्रेशन में आकर यह कदम उठाया है , फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

लॉक डाउन की वजह से अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता जैसी कई लड़कियां है जिन्हें काम की चिंता है। बता दे कि थिएटर में प्रेक्षा की शुरुआत अभिजीत वाडकर, संतोष रेगे और नगेंद्र सिंह राठौर के नाट्य ग्रुप ‘ड्रामा फैक्टरी’ से हुई। मंटो का लिखा नाटक ‘खोल दो’ उनका पहला प्ले था। इसमें मिले जबरदस्त रिस्पांस के बाद वो ‘खूबसूरत बहू, बूंदें, राक्षस, प्रतिबिंबत, पार्टनर्स, हां, थ्रिल, अधूरी औरत’ जैसे नाटकों में काम कर चुकी हैं। उन्हें अभिनय के लिए भी तीन राष्ट्रीय नाट्य उत्सवों में फर्स्ट प्राइज मिल चुका है। एकल नाट्य ‘सड़क के किनारे” में जानदार अभिनय के लिए भी उन्होंने अवार्ड जीता। ये माना जा रहा है अभिनय की ललक और दीवानगी ने ही प्रेक्षा को खुद की जान लेने को मजबूर कर दिया होगा। प्रेक्षा तो मौत की आगोश में समा गई लेकिन अपने मौत के पीछे कई सवाल छोड़ गई जिसके जवाब आने वाला वक़्त ही दे पाएगा। वही प्रेक्षा के आखरी सोशल मीडिया स्टेटस ” सबसे बुरा होता है सपनो का मर जाना” ने एक बड़ा सवाल कोरोना संकट में खड़ा कर दिया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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