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साइबर ठगी की रकम खपाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश, इंदौर पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा, 10 खातों में करोड़ों का लेनदेन

इंदौर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 4 मोबाइल, 8 सिम और 11 एटीएम कार्ड भी बरामद किए हैं।
Indore Crime News

इंदौर: मध्यप्रदेश की इंदौर पुलिस ने साइबर ठगी के पैसों को बैंक खातों के जरिए खपाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों दीपक राव और गौरव राठौर को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े करीब 10 बैंक खातों में साइबर ठगी से जुड़ी करोड़ों रुपये की रकम ट्रांसफर हुई है।

बता दें कि जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में 5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन भी मिला है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी गौरव राठौर साइबर ठगी से मिली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराने का काम करता था।

साइबर ठगी की रकम फर्जी खातों में ट्रांसफर

बताया जा रहा है कि साइबर ठगी से हासिल रकम को फर्जी तरीके से दीपक राव के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था। दीपक अंडे का ठेला लगाता था और इसके बदले गौरव उसे लेनदेन की रकम का एक कुछ प्रतिशत कमीशन के रूप में देता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।

आरोपियों के पास से 4 मोबाइल, 8 सिम और 11 एटीएम कार्ड बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, आठ एक्टिव सिम कार्ड, 10 बैंक खाते और 11 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इन सभी संसाधनों की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने तथा जांच एजेंसियों से बचने के लिए किया।

कई राज्यों तक फैला साइबर ठगी का नेटवर्क

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों का नेटवर्क केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था। आरोपियों से जुड़े साइबर ठगी के मामलों के तार देश के कई राज्यों से जुड़े मिले हैं। पुलिस के अनुसार तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी ठगी की वारदातों से इनका कनेक्शन सामने आया है। पुलिस अब बैंक खातों की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है। साथ ही मोबाइल फोन और सिम कार्ड से मिले डेटा के आधार पर आरोपियों के संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

बता दें कि पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस रकम को आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।

इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट

Shyam Dwivedi
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