इंदौर के परदेशीपुरा इलाके में बिल्डर मटेरियल सप्लायर से करीब 1.5 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला दर्ज हुआ है। दरअसल पीड़ित संजय के मुताबिक जालसाज ने पहले उसके दोस्त धर्मेंद्र जाट बनकर फोन किया और बताया कि उसकी मां को हार्ट अटैक आया है। इसके बाद दूसरे नंबर से खुद को डॉक्टर बताकर इलाज के लिए तुरंत पैसे भेजने को कहा।
दरअसल संजय ने पुलिस को बताया कि यह कॉल 15 अगस्त की शाम करीब 6 बजे आया था। कॉल करने वाले ने कहा कि वह CHL अपोलो अस्पताल में है और उसकी मां भर्ती है। बातचीत के दौरान एक व्यक्ति को उसका बेटा बताकर भी फोन पर बात कराई गई। जल्दबाजी में संजय आवाज पहचान नहीं पाया और बात पर भरोसा कर लिया।
दोस्त बनकर भरोसा जीता
पहली कॉल के कुछ देर बाद दूसरे नंबर से एक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर उमंग सिंह बताया। उसने कहा कि मरीज के इलाज के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए की जरूरत है और एक मोबाइल नंबर देकर उसी पर पैसे भेजने के लिए कहा। संजय ने बताया कि उसके पास पूरी रकम नहीं थी। इस पर आरोपी ने जितने पैसे उपलब्ध हों, उतने पहले भेजने के लिए कहा। वहीं संजय ने सबसे पहले करीब 15 हजार रुपए फोन-पे के जरिए ट्रांसफर किए। इसके बाद आरोपी लगातार कॉल करता रहा और इमरजेंसी का हवाला देकर और पैसे मांगता रहा। पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन में करीब 96 हजार रुपए भेजे। इसके बाद उसने 40 हजार रुपए और ट्रांसफर कर दिए। लगातार पैसे भेजने के बाद उसे शक हुआ कि कहीं उसके साथ धोखाधड़ी तो नहीं हो रही।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पूरी बातचीत में अस्पताल और इलाज का हवाला देकर जल्दबाजी का माहौल बनाया। पीड़ित ने भी दोस्त की मां की हालत गंभीर समझकर बिना ज्यादा पुष्टि किए पैसे भेज दिए। फिलहाल पुलिस उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए।
असली दोस्त से बात होते ही खुली ठगी की सच्चाई
संजय ने जब अपने दोस्त धर्मेंद्र जाट के असली नंबर पर फोन किया तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। धर्मेंद्र ने बताया कि वह अस्पताल में नहीं है और उसकी मां भी पूरी तरह ठीक हैं। इसके बाद संजय को एहसास हुआ कि उसके साथ साइबर ठगी हुई है। दरअसल ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद परदेशीपुरा थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब कॉल करने वाले लोगों की पहचान, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और जिन खातों में पैसे भेजे गए उनकी जानकारी जुटा रही है। साथ ही ट्रांजैक्शन की पूरी डिटेल भी खंगाली जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस साइबर ठगी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।






