
इंदौर में दूषित पानी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल भागीरथपुरा में पानी से जुड़ी बीमारी के बाद अब निजी बोरिंग के पानी की जांच में भी बैक्टीरिया मिलने का मामला सामने आया है। जांच में 52 सैंपल में से 50 में टोटल कोलीफॉर्म और 40 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित विभागों से जांच और जरूरी कार्रवाई करने को कहा है।
दरअसल इंदौर में निजी बोरिंग के पानी की जांच का यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें सिर्फ एक इलाके के पानी की बात नहीं है। जांच के दौरान अलग-अलग निजी बोरिंग से सैंपल लिए गए थे। रिपोर्ट में बैक्टीरिया मिलने के बाद पानी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। संबंधित विभागों को अब यह पता लगाना है कि पानी में गंदगी कहां से पहुंच रही है और इसे पीने लायक बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
NGT ने दिए जांच के निर्देश
वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में इंदौर के दूषित पानी से जुड़ा मामला पहुंचा था। 15 जनवरी 2026 को NGT ने इस मामले में संयुक्त जांच कमेटी बनाने और 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। कमेटी में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर प्रशासन, जल संसाधन विभाग, IIT इंदौर और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। कमेटी ने 7 मार्च को भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों का दौरा किया। इसके बाद 25 मार्च को अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि 3 जनवरी को निजी बोरिंग से पानी के 52 सैंपल लिए गए थे। इनमें 50 सैंपल में टोटल कोलीफॉर्म और 40 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। जांच में यह भी सामने आया कि भागीरथपुरा और आसपास के इलाके में निजी बोरिंग के पानी में गंदगी मिलने की समस्या है।
दरअसल NGT ने नगर निगम और राज्य सरकार को पानी की सप्लाई में लीकेज रोकने, पाइपलाइन की मरम्मत, पानी में क्लोरीन मिलाने और पानी की टंकियों की नियमित सफाई जैसे कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता की निगरानी और लोगों की शिकायतों के लिए व्यवस्था बनाने को कहा गया है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के बाद बढ़ी थी जांच
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी पीने के बाद लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया था। इलाके में उल्टी-दस्त की शिकायतें बढ़ने के बाद कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस घटना में कई लोगों की मौत हुई। पानी की जांच में ई-कोलाई और दूसरे हानिकारक बैक्टीरिया मिलने के बाद पेयजल सप्लाई पर सवाल उठे थे। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। आयोग ने 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट पेश की। सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्ट में पानी और सीवर की पाइपलाइन के बीच कम दूरी, पुरानी पाइपलाइन और समय पर मरम्मत नहीं होने जैसी खामियों का जिक्र किया गया।
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