इंदौर के विजय नगर इलाके में 23 जून को हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। अदालत में पुलिस ने बताया कि वार्ड क्रमांक 31 के भाजपा पार्षद बालमुकुंद सोनी को इस मामले में आरोपी बनाया गया है और उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान एसीपी पराग सैनी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच लगातार जारी है।
दूसरी ओर नगर निगम की ओर से पेश रिपोर्ट में कहा गया कि जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, वहां निगम की ओर से कोई बोरिंग का काम नहीं कराया जा रहा था। इस बीच हादसे में झुलसे लोगों की तरफ से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि कई पीड़ित अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और इलाज का पूरा खर्च खुद उठाने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि मुआवजे या इलाज की राशि अब तक जारी नहीं होने से परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
पीड़ितों के इलाज के खर्च पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इलाज का भुगतान आमतौर पर उपचार पूरा होने के बाद किया जाता है। इस पर पीड़ित पक्ष ने आपत्ति जताई और कहा कि अस्पतालों में हर दिन बिल बढ़ रहा है। ऐसे में बाद में भुगतान की व्यवस्था मरीजों और उनके परिवारों के लिए मुश्किल पैदा कर रही है। इस पर हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि झुलसे लोगों के इलाज का खर्च जल्द से जल्द जारी किया जाए और भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।
अदालत ने यह भी माना कि गंभीर हादसों में पीड़ितों को समय पर आर्थिक मदद मिलना जरूरी है। कोर्ट ने संबंधित विभागों से बेहतर समन्वय बनाने और राहत प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नगर निगम की विस्तृत रिपोर्ट अभी पुलिस को नहीं मिली है, जिससे जांच की कुछ प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
बालमुकुंद सोनी पर केस
पुलिस ने भाजपा पार्षद बालमुकुंद सोनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 और 125(बी) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं ऐसी लापरवाही से जुड़ी हैं, जिससे किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को खतरा पहुंचे या वह घायल हो। दोष साबित होने पर आरोपी को छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि मामले की चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि हादसे में गंभीर रूप से झुलसी कंटेंट क्रिएटर गिरी राजकुमारी उर्फ जिनी झाला अभी अहमदाबाद के अस्पताल में भर्ती हैं। उनके बयान दर्ज होने के बाद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा होगा। इसी वजह से चार्जशीट दाखिल करने में थोड़ा समय लग सकता है।
हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नगर निगम और पुलिस के बीच जरूरी दस्तावेजों का आदान-प्रदान जल्द पूरा करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जिसमें जांच की प्रगति, नगर निगम की रिपोर्ट और पीड़ितों को इलाज का खर्च मिलने की स्थिति पर फिर समीक्षा की जाएगी।






