इंदौर और उज्जैन के बीच सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से चर्चा में रहा इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड हाईवे अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गया है। प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कई आपत्तियों का समाधान कर लिया है और अब अगले महीने से निर्माण शुरू होने की तैयारी है।
हर साल महाकाल के दर्शन और व्यापारिक काम से लाखों लोग इस मार्ग पर सफर करते हैं। ऐसे में यह हाईवे सिर्फ सड़क नहीं बल्कि मालवा क्षेत्र के विकास की नई दिशा माना जा रहा है।
जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड हाईवे परियोजना में अब तक सबसे बड़ी चुनौती जमीन अधिग्रहण की थी। कई किसानों और ग्रामीणों ने जमीन, ट्यूबवेल, खेत और रास्तों से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। प्रशासन ने इन शिकायतों की सुनवाई कर अधिकतर मामलों का निराकरण कर दिया है।
अब मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है। जैसे ही किसानों को भुगतान पूरा होगा, जमीन का अधिग्रहण अंतिम रूप ले लेगा और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। बताया जा रहा है कि मार्च महीने से साइट पर मशीनें और निर्माण दल काम शुरू कर देंगे।
यह परियोजना खास तौर पर सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखकर तेज गति से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।
कहां से कहां तक बनेगा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर?
यह नया एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन ग्रीन फील्ड हाईवे इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के पास तक जाएगा। पूरा कॉरिडोर मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) द्वारा विकसित किया जा रहा है।
इंदौर और उज्जैन जिले के बीच इस परियोजना का निर्माण कार्य अलग-अलग चरणों में शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट का ठेका पंजाब के लुधियाना की एक निर्माण कंपनी को दिया गया है, जो हाईवे निर्माण के क्षेत्र में अनुभव रखती है। सांवेर और हातोद तहसील में सबसे ज्यादा आपत्तियां सामने आई थीं, लेकिन जिला प्रशासन ने किसानों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर समाधान निकाल लिया है।
दूरी और समय दोनों होंगे कम
वर्तमान में इंदौर से उज्जैन की दूरी करीब 55 से 60 किलोमीटर पड़ती है और ट्रैफिक के कारण यात्रा में डेढ़ घंटे तक लग जाते हैं। लेकिन नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनने के बाद यह दूरी करीब 30 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
करीब 48 किलोमीटर लंबा यह नया फोरलेन हाईवे पूरी तरह नियंत्रित प्रवेश वाला होगा। सड़क की चौड़ाई 45 से 60 मीटर तक रखी जाएगी, जिससे यातायात सुगम रहेगा और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। हाईवे बनने के बाद इंदौर से उज्जैन की यात्रा मात्र 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोग, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को सीधा फायदा मिलेगा।
किसानों को मिलेगा मुआवजा
इस परियोजना के लिए करीब 175 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसमें इंदौर जिले के लगभग 650 किसानों और उज्जैन जिले के आठ गांवों की जमीन शामिल है। कई किसानों ने अपनी खेती, कुओं और ट्यूबवेल को लेकर चिंता जताई थी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
मालवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा
यह ग्रीन फील्ड हाईवे सिर्फ दो शहरों को जोड़ने का काम नहीं करेगा, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देगा। बेहतर सड़क सुविधा से व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि बाजारों को फायदा होगा। ट्रांसपोर्ट लागत कम होगी और समय की बचत होगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बेहतर सड़क संपर्क पर्यटन उद्योग के लिए भी वरदान साबित होगा।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तेज हुई तैयारी
उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। सरकार चाहती है कि सिंहस्थ-2028 से पहले सड़क और यातायात व्यवस्था पूरी तरह मजबूत हो जाए। इसी वजह से ग्रीन फील्ड हाईवे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। बेहतर सड़क नेटवर्क से आयोजन के दौरान ट्रैफिक और भीड़ को संभालना आसान होगा।





