जागरूकता के लिए यहाँ पुलिस ने चौराहों पर बनवाई कोरोना पेंटिंग्स

जागरूकता के लिए यहाँ पुलिस ने चौराहों पर बनवाई कोरोना पेंटिंग्स

ग्वालियर।अतुल सक्सेना

कोरोना(corona) से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से ग्वालियर पुलिस नये नये प्रयोग कर रही है। जागरूकता रैली, कोरोना हेलमेट(corona helmet), गाने(songs), एनाउंसमेंट(announcement) के बाद अब पुलिस चौराहों पर कोरोना पेंटिंग्स बनवा रही है।

लॉक डाउन(lockdown) का पालन करवाने के लिए सड़क पर तैनात पुलिस(police) कभी सख्ती तो कभी नरमी से पेश आ रही है। पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन के निर्देश पर सोशल मीडिया सहित सभी प्लेटफॉर्म(platform) पर लोगों को जागरूक करने के प्रयास किये जा रहे हैं। पुलिस की आईटी(IT) और साइबर सेल(cyber cell) रोज कोरोना से बचाव के लिए नये नये पोस्टर(poster) और पेम्प्लेट बनाकर पोस्ट कर रही है तो सड़कों पर कोरोना हेलमेट पहनकर जागरूकता रैली निकाली जा रही है । पुलिसकर्मचारी, अधिकारी गाने गाकर भी कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अब पुलिस कोरोना पेंटिंग्स बनवा रही है।

पड़ाव थाना क्षेत्र के टी आई नागेंद्र सिंह के मुताबिक वे अपने थाना क्षेत्र के सभी बड़े चौराहों पर कोरोना पेंटिंग्स बनवा रहे हैं पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनाई जा रही पेंटिंग्स ने कोरोना वायरस दिखाया गया है साथ ही बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है “कोरोना जानलेवा है, लॉक डाउन का पालन करें”। टी आई का कहना है कि हमें भरोसा है कि जो भी शहरवासी यहाँ से निकलेगा वो इस पेंटिंग को देखकर लॉक डाउन का पालन करने में अवश्य सहयोग करेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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