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दूषित पानी से 24 मौतों पर सियासी घमासान, राहुल गांधी को सभी पीड़ित परिवारों के घर जाने की इजाजत नहीं

Written by:Banshika Sharma
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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद राहुल गांधी 17 जनवरी को पीड़ितों से मिलना चाहते हैं। वे सभी मृतकों के घर जाने पर अड़े हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिससे गतिरोध की स्थिति बन गई है।
दूषित पानी से 24 मौतों पर सियासी घमासान, राहुल गांधी को सभी पीड़ित परिवारों के घर जाने की इजाजत नहीं

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से 24 लोगों की मौत के मामले में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जनवरी को पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर आ रहे हैं, लेकिन उनके दौरे को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। राहुल गांधी सभी मृतकों के घर जाकर उनके परिजनों से मिलना चाहते हैं, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

गुरुवार को राहुल गांधी के दफ्तर से प्रतिनिधि सुशांत मिश्रा इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पहुंचे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और मृतकों के घरों की सूची तैयार की। यह सूची प्रशासन को सौंपकर राहुल गांधी के दौरे की अनुमति मांगी गई थी।

प्रशासन ने दिया संकरी गलियों का हवाला

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भागीरथपुरा की गलियां काफी संकरी हैं। ऐसे में राहुल गांधी की सुरक्षा टीम और गाड़ियों के काफिले का सभी घरों तक पहुंचना संभव नहीं है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी घरों में जाने की अनुमति देने से मना कर दिया। अधिकारियों ने कांग्रेस नेताओं को सुझाव दिया कि सभी पीड़ित परिवारों को किसी एक स्थान पर बुलाकर राहुल गांधी से मुलाकात करा दी जाए, लेकिन कांग्रेस इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि गतिरोध खत्म करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जा सकता है और कुछ चुनिंदा 10 से 12 पीड़ित परिवारों के घर जाने की अनुमति दी जा सकती है।

कांग्रेस का प्रदेशव्यापी उपवास सत्याग्रह

राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति भी तय कर ली है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर में नगरीय निकाय प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन करना चाहती थी, लेकिन राहुल गांधी के कार्यालय से केवल भागीरथपुरा के कार्यक्रम पर ही ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, 17 जनवरी को प्रदेश के सभी जिला कांग्रेस संगठनों को भागीरथपुरा की घटना के विरोध में अपने-अपने क्षेत्रों में ‘उपवास सत्याग्रह’ करने का निर्देश दिया गया है।

मौतों के आंकड़ों पर भी उलझन

एक तरफ जहां इस मुद्दे पर राजनीति हो रही है, वहीं दूसरी ओर दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या को लेकर भी सरकार और प्रशासन के बीच असमंजस की स्थिति है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में इस मामले से जुड़ी पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट के आदेश पर पेश हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने यह स्वीकार किया कि मौतें दूषित पानी से हुई हैं, लेकिन वे सटीक संख्या नहीं बता सके।

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन की रिपोर्ट में 21 मौतों का जिक्र है, जिनमें से केवल 15 मौतें दूषित पानी से और बाकी अन्य बीमारियों से हुई बताई गई हैं। हालांकि, गुरुवार को ही 78 वर्षीय सुभद्राबाई पंवार की मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा 24 तक पहुंच गया है। अब तक इस त्रासदी में 3300 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं।

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Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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