दुनिया का अनोखा होटल जहां से आसमान नहीं, दिखती हैं पानी की लहरें

चीन के शंघाई में बना इंटरकॉन्टिनेंटल शंघाई वंडरलैंड को वॉटरफॉल होटल भी कहा जाता है, जो कि दुनिया का अनोखा होटल है। 18 मंजिला यह होटल पानी के नीचे बने सुइट्स, झरने, शानदार रेस्टोरेंट के लिए मशहूर है।
Waterfall Hotel China

अगर आपको कभी ऐसा मौका मिले कि आप किसी ऐसी जगह होटल में ठहरें जहां खिड़की से बाहर देखने पर पानी में मछलियां तैरती दिखें, ऊपर आसमान नहीं बल्कि झील की लहरें नजर आएं और सामने झरने की गूंज कानों में गूंजे… तो आपको ऐसा लगेगा मानो आप किसी दूसरी दुनिया में चले आए हैं। इसे इमेजिन करना ही अपने आप में काफी अलग है, लेकिन यकीन मानिए चीन में एक ऐसा होटल मौजूद है, जहां इस सपने को हकीकत में आप बदल सकते हैं। यहां आप एक अनोखी दुनिया को जी सकते हैं। यहां जाने के बाद आपको फिर अपने घर वापस लौटने का मन नहीं करेगा। चीन जाने वाले टूरिस्ट जरूर ही इस होटल में रुकने की चाहत रखते हैं।

दरअसल, इस मशहूर होटल के का नाम इंटरकॉन्टिनेंटल शंघाई वंडरलैंड होटल है, जिसे दुनिया “वॉटरफॉल होटल” के नाम से जानती है। यह कोई आम होटल नहीं है, बल्कि धरती के नीचे बनी एक ऐसी इमारत है जो इंजीनियरिंग का चमत्कार कही जाती है।

इंटरकॉन्टिनेंटल शंघाई वंडरलैंड होटल

शंघाई के सोंगजियांग जिले में बना इंटरकॉन्टिनेंटल शंघाई वंडरलैंड होटल एक पुरानी खदान के अंदर बसा है। पहले यहां चट्टानें तोड़ी जाती थीं, लेकिन अब यह जगह सुकून और शानदार नज़ारों का घर बन गई है। करीब 88 मीटर गहरी इस खदान को 18 मंजिला होटल में बदला गया है। इनमें से 16 मंजिलें जमीन के नीचे हैं और दो मंजिलें तो पानी के भीतर बनाई गई हैं। इसलिए इसे क्वारी होटल यानी खदान होटल भी कहा जाता है।

इस होटल की सबसे अनोखी पहचान इसके सामने बने कृत्रिम झरने से है। करीब 90 मीटर ऊंचा यह वॉटरफॉल खदान की दीवार से नीचे गिरता है, जो देखने वालों को ऐसा लगता है मानो किसी फिल्मी सेट पर खड़े हों। दिन में धूप की किरणें जब इस झरने पर पड़ती हैं, तो पानी के छींटों में इंद्रधनुष सा नजारा दिखता है। इस खूबसूरती को वहां से गुजरने वाले सभी लोग अपने कैमरे में कैद किए बिना खुद को रोक नहीं पाते हैं।

2009 में प्रोजेक्ट की शुरुआत

इस जगह का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। बताया जाता है कि यह खदान 1950 के दशक में जापानी सैनिकों ने युद्ध के समय बंकर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बनाई थी। युद्ध खत्म हुआ, खदान बेकार पड़ी रही और धीरे-धीरे इसमें पानी भर गया। कई सालों बाद 2006 में शंघाई के एक प्रॉपर्टी ग्रुप ने इसमें संभावना देखी और सोचा कि क्यों न इसे दुनिया का सबसे अनोखा होटल बना दिया जाए? फिर क्या था साल 2009 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। लगभग 4 हजार करोड़ रुपये खर्च करके 10 साल की मेहनत के बाद इसे तैयार किया गया। कई देशों की आर्किटेक्चर फर्म्स ने मिलकर इस होटल को डिजाइन किया। डिजाइन में फेंगशुई का भी ध्यान रखा गया ताकि यह प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखे। ऊपर से देखने पर इसका आकार ‘S’ जैसा दिखता है।

इनवर्टेड ग्राउंडस्क्रेपर

आमतौर पर इमारतें ऊपर की ओर बढ़ती हैं, जिन्हें स्काईस्क्रेपर कहा जाता है, लेकिन यह होटल उल्टा है। यह नीचे की ओर बना है, इसलिए इसे इनवर्टेड ग्राउंडस्क्रेपर कहा जाता है। इसका मतलब है कि जहां बाकी होटल आसमान छूते हैं, यह धरती के भीतर उतरता है। यह होटल पूरी तरह सिंगल-यूज प्लास्टिक फ्री है। यहां रीसायकल सिस्टम के जरिए पानी और कचरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसे ब्राउनफील्ड रिवाइवल प्रोजेक्ट कहा गया है। होटल में कुल 337 कमरे हैं। इनमें से कुछ झील की सतह के पास हैं और कुछ कमरे तो पानी के नीचे बने हैं। यहां के अंडरवॉटर सुइट्स में कांच की दीवारें हैं, जिनसे मेहमान झील के अंदर की दुनिया को नजदीक से देख सकते हैं। खाने-पीने के लिए भी यहां अनोखी जगहें हैं, जिसमें पानी के नीचे बना सीफूड रेस्टोरेंट, शानदार क्वारी बार और कैंटोनीज फाइन डाइनिंग रेस्टोरेंट शामिल हैं।

पास के थीम पार्क में जिपलाइन, बंजी जंप, रॉक क्लाइम्बिंग और ग्लास वॉकवे जैसी गतिविधियां हैं। वहीं होटल में इनफिनिटी पूल और स्पा का मजा लेते हुए लोग खुद को किसी और दुनिया में महसूस करते हैं। यदि आप भी चीन जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको यहां अवश्य जाना चाहिए।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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