बुजुर्ग जोड़ा कबाड़ में फेंकने जा रहा था पुरानी मूर्तियां, नीलामी हुई तो 2 करोड़ में बिकीं

बुजुर्ग जोड़ा कबाड़ में फेंकने जा रहा था पुरानी मूर्तियां, नीलामी हुई तो 2 करोड़ में बिकीं

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। क्या आपके घर कोई पुरानी मूर्ति या स्कल्पचर रखा है। और क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है कि आखिर वो कितना पुराना है और उसकी कीमत क्या हो सकती है। दरअसल इंग्लैंड (England) के सफॉक (Suffolk) में रहने वाला एक बुजुर्ग जोड़ा अपने गार्डन में रखी पुरानी मूर्तियों को कबाड़ में देने का मन बना चुके थे। लेकिन फिर उन्होने इसकी नीलामी का फैसला लिया और इसके बाद जो हुआ, उससे सभी के होश उड़ गए।

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अपना घर बदलते हुए इनकी नजर गार्डन में रखी स्फीनिक्स (Sphinxes staute in garden) की दो पुरानी मूर्तियों पर पड़ी। काफी पहले उन्होने करीब तीस हजार रूपये में इन्हें खरीदा था। एकबारगी तो उन्होने सोचा कि उसे वहीं छोड़ देते हैं वो कबाड़ में चली जाएगी। लेकिन फिर काफी सोचने के बाद तय किया कि इसकी नीलामी कर दी जाए, थोड़े बहुत पैसे तो मिल ही जाएंगे। इसके बाद उन्होने नीलामी के लिए मैंडर ऑक्शनर्स से संपर्क किया और फिर जो बात सामने आई वो सभी को हैरान करने वाली थी। मूर्ति को जांच कर बताया गया कि वो काफी पुरानी और दुर्लभ है। मिरर वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक पहले ये अंदाजा लगाया गया कि मूर्ति 18वीं या 19वीं शताब्दी की होगी। मगर जानकारों का कहना है कि ये 5 हजार साल पहले तक की हो सकती है जो असल में मिस्र की हैं। संभावना है कि उन्हें 18वीं शताब्दी के आसपास अन्य देशों में ले जाया गया हो।

इस खुलासे के बाद नीलामी की गई। 20 हजार रुपये से बोली लगना शुरू हुई और आखिर में ये दो मूर्तियां 2 करोड़ में बिकीं। हालांकि ऑक्शन से पहले खरीदारो को बताया नहीं गया था कि मूर्ति का ऐतिहासिक महत्व क्या है, लेकिन धीरे धीरे लोगों का रूझान इसकी और गया और किसी समय फालतू समझ गार्डन में रखी मूर्तियां 2 करोड़ में खरीदी गईं।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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