भारत और फ्रांस के रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों का उत्पादन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में ही किया जाएगा। यह बड़ी घोषणा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को की, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
इंडिया AI समिट के दौरान मीडिया से बात करते हुए मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश रक्षा सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस और भारत अब राफेल जेट कार्यक्रम को मिलकर आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसका आधार भारत में संयुक्त उत्पादन होगा। यह कदम भविष्य के सभी ऑर्डरों के लिए एक नींव का काम करेगा।
‘मेक इन इंडिया’ होगा नए ऑर्डर का मुख्य हिस्सा
राष्ट्रपति मैक्रों ने इस बात की पुष्टि की कि भारत ने हाल ही में राफेल विमानों के एक नए बैच का ऑर्डर देने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि भारत इस प्लेटफॉर्म के आसपास औद्योगिक सहयोग को और भी मजबूत करना चाहता है।
“राफेल पर हम और आगे बढ़ना चाहते हैं। भारत ने कुछ दिन पहले नए 114 राफेल विमानों के एक नए बैच का ऑर्डर देने की इच्छा जताई है और साथ में उत्पादन करने की भी। इस नए ऑर्डर में ‘मेक इन इंडिया’ मुख्य हिस्सा होगा।”- इमैनुएल मैक्रों, राष्ट्रपति, फ्रांस
मैक्रों ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो मौजूदा सहयोग को मजबूत करेगा और भविष्य की राह खोलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ है, जो सामान्य रक्षा संबंधों से कहीं बढ़कर है।
पनडुब्बी और एयरोस्पेस में भी बढ़ेगा सहयोग
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि राफेल जैसा सफल सहयोग मॉडल अन्य बड़े रक्षा क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पनडुब्बियों का उल्लेख किया, जो भारत के लिए एक रणनीतिक जरूरत है।
इसके अलावा, एयरोस्पेस सेक्टर में भी साझेदारियां बढ़ाने पर जोर दिया गया, जिसे भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग के एक नए युग का हिस्सा माना जा रहा है। मैक्रों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि फ्रांस भारत में अधिक से अधिक स्थानीय सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
उन्होंने भरोसा दिलाया, “हम बेहद प्रतिबद्ध हैं कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय घटक हों और ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण डिवाइस भारत में बनें। आप हम पर भरोसा कर सकते हैं।” यह बयान भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लक्ष्य को बड़ा समर्थन देता है।






