प्रदेश में चल रही बंगला पॉलिटिक्स के बीच कांग्रेस विधायक ने छोड़ा बंगला, निगम को सौंपी चाबी

प्रदेश में चल रही बंगला पॉलिटिक्स के बीच कांग्रेस विधायक ने छोड़ा बंगला, निगम को सौंपी चाबी

जबलपुर|संदीप कुमार| प्रदेश मे चल रही बंगला पाॅलिटिक्स (Bungalow Politics) के बीच कांग्रेस (Congress) की एक विधायक (MLA) ने बंगले का मोह ही त्याग दिया है। जबलपुर के उत्तर मध्य विधानसभा से विधायक विनय सक्सेना ने राइट टाउन चंचलाबाई के पास आवंटित अपने बंगले की चाबी नगर निगम को सौंप दी है। ऐसा नही है कि विधायक विनय सक्सेना को बंगला खाली करने को कोई नोटिस दिया गया था बल्कि उनके द्वारा खुद ही अपने बंगले को खाली कर दिया गया। इस बात के लिए जब विधायक से बात की गई तो उन्होने बताया कि प्रदेश मे बंगलो के नाम पर चल रही औछी राजनीती से दुखी होकर ये कदम उन्हे उठाना पड़ा।

सरकार बदली है तो विपक्षी जनप्रतिनिधियो को मिलने वाली सरकारी सुविधाओ मे भी कटौती की जा रही है| कुछ वो है जिन्हे सरकार ने सरकारी बंगलो से बेदखली के नोटिस दिए है तो कुछ वो है जो इन बंगलो को छोड़ने से बचना चाहते है या फिर समय की मांग कर रहे है। इस बीच जबलपुर से एक विधायक को पिछले साल मिला सरकारी बंगला उन्होने खुद ही खाली कर दिया है| इस कदम के पीछे उन्होने भाजपा के चाल चरित्र को ज़िम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि वो भाजपा की कृपा की कोई ज़रूरत नही है | इससे पहले कि उन्हे भी बंगला खाली करने का नोटिस मिले उन्होने खुद ब खुद ही बंगला खाली करना ज्यादा मुनासिफ समझा है। इस बीच उनके द्वारा बंगले मे लगाए गए एसी , कमोड और अन्य सामग्रियों को निकलाने का काम किया जा रहा है। विधायक ने बंगले का बकाया बिजली बिल समेत अन्य सभी शुल्क भी जमा कर दिए है ताकि उनका बकाया किसी और को न चुकाना पड़े।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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