करोड़ों के घोटाले के आरोप में ASI, आरक्षक सहित 12 से अधिक कर्मचारियों पर एफआईआर

आरक्षक अभिषेक झारिया को जब इस घोटाले की जानकारी लगी तो 13 नवंबर 2025 की रात को शोभापुर रेलवे फाटक के सामने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली।
Jabalpur News

छठवीं बटालियन में हुए तीन करोड़ रुपए के घोटाले के बाद आखिरकार दो माह बाद रांझी थाना पुलिस यहां पर पदस्थ एएसआई और आरक्षक सहित 12 से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। टीए घोटाले का मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा है जो कि अभी भी फरार चल रहा है।

बताया जा रहा है कि 2019 से 2025 के बीच तकरीबन साढ़े तीन करोड़ से अधिक का टीए घोटाला हुआ था। कोष लेखा भोपाल ने जब इसकी जांच की तो रिपोर्ट छठवीं बटालियन में पदस्थ कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी को भेजी गई, इसके बाद जांच के लिए उनके द्वारा एक टीम गठित की गई। इधर जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने भी जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में एक टीम गठित की।

एएसआई घोटाले का मास्टरमाइंड 

शुरुआती जांच में पता चला कि एएसआई सत्यम शर्मा ही इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड है, जिसने आरक्षक अभिषेक झारिया के साथ मिलकर कई लोगों को इस दिए घोटाले में शामिल किया। आरक्षक अभिषेक झारिया को जब इस घोटाले की जानकारी लगी तो 13 नवंबर 2025 की रात को शोभापुर रेलवे फाटक के सामने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली।

विभाग ने एएसआई को निलंबित किया  

इधर घोटाले में प्रथम दृष्टया सत्यम शर्मा को आरोपी मानते हुए निलंबित कर दिया गया। करीब दो माह तक लगातार चली इस जांच के बाद जबलपुर पुलिस ने पाया कि सत्यम शर्मा ने टीए घोटाला करते हुए छठवीं बटालियन में पदस्थ उन आरक्षकों के खाते में पहले तो रकम ट्रांसफर की और उसके बाद फिर उन्हें कुछ राशि देते हुए वह पूरा पैसा अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिया।

पुलिस ने शुरू की जाँच 

पुलिस की जांच में अभी तक सत्यम शर्मा, मृत आरक्षक अभिषेक झारिया सहित 12 से अधिक नाम सामने आए हैं। रांझी थाना पुलिस ने धारा 318-4, 336-3, 61 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि सत्यम शर्मा की तलाश में जल्द ही पुलिस की एक टीम छिंदवाड़ा रवाना होगी।

Atul Saxena
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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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