Jabalpur :आज नही खुलेंगी शराब दुकानें, कलेक्टर ने दिए बंद रखने के निर्देश

Jabalpur :आज नही खुलेंगी शराब दुकानें, कलेक्टर ने दिए बंद रखने के निर्देश

जबलपुर। संदीप कुमार।

लॉक डाउन के बाद भी बीते 2 सप्ताह से शराब दुकानें खुल रही थी जिसका कि स्थानीय लोगों सहित कई नेताओं ने भी विरोध किया पर सरकार थी कि राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार दुकानों को खोल कर रखी थी। ऐसे में लोगों के द्वारा प्रशासन पर कई तरह के आरोप भी लगाए जा रहे थे कि शराब को आवश्यक वस्तु में शामिल करके बहुत बड़ी गलती सरकार की गई है। इतना ही नहीं छोटे दुकानदारों को लॉक डाउन की बात कह उनके संस्थानों को बंद किए गए पर शराब दुकान को खोलने की अनुमति दी गई। लगातार हो रही किरकिरी को देखते हुए आखिरकार रविवार 12 जुलाई को कलेक्टर ने नगर निगम सीमा क्षेत्र में सभी देशी-विदेशी शराब की दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए हैं।कलेक्टर भरत यादव ने सहायक आयुक्त आबकारी निर्देश दिए हैं कि वह इन आदेशों का पालन सभी दुकानदारों से करवाएं।

पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने शराब दुकान खोलने पर जताई थी आपत्ति….

लॉक डाउन के चलते छोटे व्यापारियों के संस्थानों को बंद करवा कर जिला प्रशासन शराब की दुकान खुलवा रहा था जिस पर कि पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने भी आपत्ति जताई थी। पूर्व मंत्री ने कहा था कि सरकार छोटे व्यापारियों को तो लॉक डाउन में घरों पर कैद कर रही है पर अपना राजस्व बढ़ाने के लिए शराब दुकानें खुलवा रही हैं जिससे साबित होता है कि सरकार को सिर्फ राजस्व से मतलब है ना कि छोटे व्यापारियों से।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews