Jabalpur News : खेत में बनी झोपड़ी में लगी आग, आदिवासी दम्पति जिंदा जले

Jabalpur News : खेत में बनी झोपड़ी में लगी आग, आदिवासी दम्पति जिंदा जले

जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर के चोराई गांव में बीती रात आदिवासी दंपत्ति की आग में जिंदा जलकर मौत हो गई घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा है तो वहीं सूचना के बाद बरगी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और इस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है।

घटना का खुलासा आज सुबह तब हुआ जब खेत में बंधे जानवर की रस्सी कटी हुई मिली और वह गांव के अंदर घूम रहे थे। जानवरों को गांव में घूमता देख दम्पति के परिजन खेत पर पहुंचे जहां उन्हें झोपड़ी जली हुई मिली और उसी में दोनों के जले हुए शव मिले।  परिजनों ने पुलिस को घटना की सूचना दी।

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बरगी पुलिस ने बताया कि सुबह सूचना मिली कि ग्राम चौरई में खेत में बनी झोपड़ी में आग लगने के कारण 60 वर्षीय सुमेर सिंह कुलस्ते एवं उनकी पत्नी 55 वर्षीय सिया बाई की आग से जलकर मौत हो गई है, दोनों के शव जली हुई हालत में झोपड़ी में पड़े हैं। सूचना मिलते ही बरगी टीआई रितेश पांडे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, मौके पर घास फूस से बनी झोपड़ी जली हुई थी और उसी में दम्पति के जले हुए शव पड़े थे।

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बरगी टीआई रितेश पांडे ने बताया कि जिस झोपड़ी में सुमेर एवं सिया बाई सो रहे थे, वह पूरी घास फूस से बनी हुई थी, वहीं पर एक चूल्हा भी जल रहा था, झोपड़ी में बिजली की लाइन से तार खींचकर लाइट भी लगी हुई है, आग शार्ट सर्किट से लगी है, चूल्हे से लगी है या फिर किसी ने जानबूझकर झोपड़ी में आग लगाई है इन बिंदु पर पुलिस जांच कर रही है।  सवाल ये उठता है कि आखिर खेत में बंधे जानवरों की रस्सी किसने काटी है?

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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