सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में लोग अब अपनी जान तक जोखिम में डालने लगे हैं। नए साल के जश्न के नाम पर रोमांचक रील बनाने का जुनून इतना बढ़ गया कि कुछ युवक और नाबालिग सीधे रेलवे ट्रैक तक पहुंच गए। उन्हें न अपनी जान की चिंता थी, न दूसरों की सुरक्षा की। शोभापुर रेलवे फाटक के पास जो हुआ, वह सिर्फ कानून तोड़ने का मामला नहीं था, बल्कि एक बड़े हादसे की आशंका भी थी। अगर समय रहते रेलवे सुरक्षा बल (RPF) मौके पर न पहुंचता, तो हालात कुछ भी हो सकते थे।
शोभापुर रेलवे ट्रैक पर रील बनाने का मामला
गुरुवार को नए साल के मौके पर दो युवक और चार नाबालिग शोभापुर रेल फाटक के पास पहुंचे। ये सभी अलग-अलग इलाकों में रहने वाले थे, लेकिन मकसद एक ही था चलती ट्रेन के सामने रील बनाना और सोशल मीडिया पर डालना। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये लोग रेलवे ट्रैक के बेहद करीब खड़े होकर मोबाइल फोन से सेल्फी और वीडियो बना रहे थे। ट्रेन आने का इंतजार किया जा रहा था ताकि ड्रैमेटिक रील रिकॉर्ड की जा सके। यह हरकत न सिर्फ उनकी जान के लिए खतरनाक थी, बल्कि ट्रेन यात्रियों के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा कर रही थी।
RPF की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
उसी समय रेलवे सुरक्षा बल की टीम इलाके में गश्त कर रही थी। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब के नेतृत्व में जवान ऑपरेशन दोस्ती के तहत शोभापुर क्षेत्र में पहुंचे थे। इस अभियान का मकसद रेलवे ट्रैक के पास होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकना और लोगों को जागरूक करना था। गश्त के दौरान RPF अधिकारियों की नजर रेलवे ट्रैक पर खड़े इन युवकों और नाबालिगों पर पड़ी। तुरंत हालात की गंभीरता को समझते हुए टीम ने घेराबंदी की और सभी को मौके पर ही पकड़ लिया। RPF की इस तत्परता से एक बड़ा रेल हादसा टल गया।
आरोपियों के हाथ में मिले पत्थर
कार्रवाई के दौरान RPF ने रेलवे ट्रैक के आसपास कुछ और संदिग्ध गतिविधियां भी देखीं। कुछ नाबालिग पटरी के पास बैठे हुए थे और उनके हाथों में पत्थर थे। सुरक्षा बल ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए चार नाबालिगों को मौके से पकड़ लिया। पूछताछ में इन नाबालिगों ने स्वीकार किया कि वे मस्ती के लिए चलती यात्री ट्रेनों पर पत्थर फेंकते थे। कुछ बच्चे ट्रेन का इंतजार करते हुए पास के नाले में पत्थर फेंक रहे थे और मौका मिलते ही ट्रेन पर निशाना साधते थे।
रेलवे अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई
RPF ने सभी आरोपियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की है। बालिग आरोपियों पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि नाबालिगों के परिजनों को मौके पर बुलाया गया। अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया गया और सख्त चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा इस तरह की घटना में बच्चे शामिल पाए गए, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। इसके बाद नाबालिगों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द किया गया।





