श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर देशभर में भक्तों के बीच जबरदस्त उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में अलग-अलग स्थानों पर मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विभिन्न हिस्सों में मटकी फोड़ने की अलग-अलग परंपराएं और तरीके देखने को मिलते हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश के जबलपुर में भी मटकी फोड़ का अनोखा आयोजन किया गया जो लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा।
10 साल पहले युवाओं ने शुरू की थी अनोखी मटकी फोड़ प्रतियोगिता
जानकारी के अनुसार, गांव में इस अनोखी मटकी फोड़ प्रतियोगिता की शुरुआत करीब 10 साल पहले कुछ युवाओं ने की थी। जन्माष्टमी के दिन गांव के बाहर स्थित तालाब में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में रोमांच के साथ गांव के युवाओं की हिम्मत और जज्बा भी देखने को मिलता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में ग्रामीण इस अनूठी प्रतियोगिता को देखने और इसमें हिस्सा लेने पहुंचते हैं।
रस्सी के सहारे लटककर मटकी तक पहुंचते हैं प्रतियोगी
जबलपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर कुआंखेड़ा गांव में इस अनोखी मटकी फोड़ प्रतियागिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण इसे देखने के लिए पहुंचते है। मटकी फोड़ प्रतियोगिता के लिए गांव के बाहर स्थित तालाब के दोनों छोर पर लगभग 120 फीट लंबा रस्सा बांधा जाता है जिसकी ऊंचाई 40 फीट ऊंची होती है। मटकी फोड़ने के लिए लटककर रस्सी के सहारे उस तक पहुंचना होता है इस दौरान आयोजनकर्ता रस्सी को जोर-जोर से हिलाते भी है। जो भी व्यक्ति उस मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ देता है वह प्रतियोगिता का विजेता होता है।
मटकी फोड़ प्रतियोगिता की नकद विजेता राशि
कुआंखेड़ा गांव में बीते कई सालों से चली आ रही इस परंपरा को करने का जिम्मा गांव के ही युवाओं ने ले रखा है। 5100 से लेकर 11000 तक का इनाम दिया जाता है। इसके साथ ही ग्रामीणों के द्वारा अलग से इनाम भी दिया जाता है। कई बार यह प्रतियोगिता दो से तीन दिन तक भी चलती है। आयोजकों का कहना है कि लोग नशे से दूर रहें और अपना दमखम बनाएं इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। हर साल यहां पर प्रतिभागियों की संख्या बढ़ रही है और देखने वाली भी दूर-दूर से मटकी फोड़ प्रतियोगिता को देखने आते हैं। इस साल इस प्रतियोगिता को ग्राम सुंदरादेही के गनपत सिंह ने जीता है।
प्रतियोगिता के जरिए युवाओं को खास संदेश
आयोजनकर्ता अभिषेक कुमार का कहना है कि आज के युवा जो कि अधिकतर समय मोबाइल के जरिए रील में ज्यादात्तर समय व्यस्त रहते है। इस तरह का कार्यक्रम खासकर उनके लिए ही किया जाता है। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता के जरिए संदेश भी दिया जाता है कि जो युवा नशे से जितना ज्यादा दूर रहेगा, उसकी सेहत उतनी ही अच्छी होगी।





