मंत्री प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र मामला, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में कहा, जाति प्रमाणपत्र की होगी जांच

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर मंत्री पद हासिल करने को लेकर हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
MP High Court

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प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लेकर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने वादा किया कि प्रतिमा बागरी के कास्ट सार्टिफिकेट की जांच करवाई जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए उच्च स्तरीय छानबीन समिति गठित करेगी जो कि जांच रिपोर्ट तैयार कर सरकार के समक्ष पेश करेगी।

सरकार की और से यह भी कहा गया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी को तलब कर इस पूरे मामले की पूछताछ के साथ-साथ जांच भी होगी। कोर्ट को बताया गया कि 60 दिनों के भीतर जांच को कंपलीट कर लिया जाएगा। सरकार की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि 60 दिनों में अगर जांच नहीं हुई तो फिर से सुनवाई होगी।

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर मंत्री पद हासिल करने को लेकर हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में उन्होंने दलील दी कि मंत्री प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति नहीं बल्कि राजपूत समाज से आती है। हालांकि इससे पहले प्रदीप अहिरवार ने याचिका को वापस ले लिया था, जिसके बाद नए सिरे से दोबारा याचिका तैयार कर फिर से हाईकोर्ट में दायर की है।

SC सीट से जीती हैं प्रतिमा बागरी 

बता दे कि एससी आरक्षित रैगांव सीट से प्रतिमा बागरी ने विधानसभा चुनाव जीता था, और फिर मंत्री बनी। कांग्रेस के प्रदीप अहिरवार ने नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति के आरक्षण का गलत तरीके से लाभ उठाया और मंत्री पद हासिल किया।

याचिकाकर्ता का दावा SC नहीं हैं मंत्री 

उन्होंने कहा कि बागरी अनुसूचित जाति नहीं राजपूत और ठाकुर समुदाय में आते हैं। मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। राज्य सरकार ने जब इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की , तो हाईकोर्ट की दरवाजा खटखटाया गया और फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लेकर याचिका दायर की गई। प्रतिमा बागरी ने सतना जिले में रैगांव सीट से 36,060 वोटों से चुनाव जीती हैं। उन्होंने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को हराया था।

याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का कहना है कि सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र, जहां से प्रतिमा बागरी विधायक हैं, वह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। लेकिन तथ्य यह है कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले ‘बागरी’ जाति के लोग मूल रूप से ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं और अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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