लॉकडाउन में बदला नर्मदा का स्वरुप, सालों बाद दिख रहा ऐसा नजारा

लॉकडाउन में बदला नर्मदा का स्वरुप, सालों बाद दिख रहा ऐसा नजारा

जबलपुर| संदीप कुमार| 21 मार्च से चले आ रहे लॉक डाउन ने भले ही शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल बना कर रखा हुआ हो पर इस लॉक डाउन से माँ नर्मदा का पूरा स्वरूप ही बदल गया है।लॉक डाउन के समय कल-कल बह रही नर्मदा नदी का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है।

अभी भीड़ नही सन्नाटा पसरा हुआ नर्मदा के ग्वारीघाट तट पर……
आम दिनों में नर्मदा के ग्वारीघाट तट पर हजारो लोगो का जमघट लगा रहता था लोग नर्मदा नदी में नहाने के साथ साथ पूजा पाठ कर फूल माला नदी में ही विसर्जित करते थे परिणामस्वरूप नर्मदा माँ प्रदूषित होती थी।लोगो को जिला प्रशासन ने नर्मदा को साफ रखने के लिए कई बार हिदायत भी दी पर नतीजा शिफर ही रहा।

एक माह के लॉक डाउन में बदल गई माँ नर्मदा की तस्वीर…..
आज नर्मदा नदी की तस्वीर ही बदल गई है जहाँ देखो वहाँ शीतल जल शान्ति के साथ बह रहा है।आज न कोई नर्मदा को प्रदूषित कर रहा है और न ही नदी में पूजा अर्चना हो रही है।जानकर बताते है कई सालों बाद इतनी शीतल और साफ देखी जा रहा है माँ नर्मदा का रूप……

माँ नर्मदा के अनुयायी मिलें कमिश्नर से
आज पदभार ग्रहण करने से पहले संभाग कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी ने माँ नर्मदा के दर्शन किए इस दौरान माँ नर्मदा के भक्तों ने उनसे मुलाकात कर निवेदन किया है कि नर्मदा प्रदूषित न हो इसके लिए कुछ कड़ा उपाय करें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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