मध्य प्रदेश में बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े के बीच, जबलपुर में नर्सिंग छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया है। सालों से अपना भविष्य अधर में लटके देख रहे नर्सिंग छात्र-छात्राओं का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। छात्रों की मुख्य मांग है कि उनके रोके गए एग्जाम जल्द से जल्द कराए जाएं और पेंडिंग रिजल्ट जारी किए जाएं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वे साल 2020-21 से नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। लगातार हो रही देरी और कोर्ट स्टे के कारण वे अब तक ग्रेजुएट नहीं हो पाए हैं। छात्रों ने जबलपुर हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि इस संवेदनशील मामले में जल्द से जल्द सुनवाई कर कोई ठोस निर्णय लिया जाए ताकि उनका शैक्षणिक सत्र और भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सके।
3 अगस्त को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई
इस पूरे मामले पर आगामी 3 अगस्त को हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस अहम सुनवाई में छात्रों की समस्याओं के समाधान का कोई न कोई रास्ता निकल सकता है। वर्तमान स्थिति यह है कि हाई कोर्ट के आदेशानुसार ‘अनसूटेबल’ (अयोग्य) और ‘डेफिशिएंट’ (कमियों वाले) घोषित किए गए कॉलेजों के विद्यार्थियों की परीक्षाओं और उनके रिजल्ट पर रोक लगी हुई है। यह रोक हजारों छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में सत्र 2020-21 के दौरान बिना मापदंडों के धड़ाधड़ खोले गए फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़ा है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इन फर्जी कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी।
CBI जांच में 600 से अधिक नर्सिंग कॉलेज मानकों पर फेल
सीबीआई जांच में प्रदेश के लगभग 800 से अधिक नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज नियमों और मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में केवल 245 कॉलेज ही ‘सूटेबल’ (योग्य) पाए गए। अदालत के निर्देश पर सिर्फ सूटेबल कॉलेजों के लगभग 8,000 छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है और उन्हीं के परिणाम जारी हो सकेंगे। दूसरी ओर, बाकी हजारों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा वेरोनिका ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कॉलेजों की गड़बड़ियों और प्रशासनिक कमियों की सजा उन मासूम छात्रों को भुगतनी पड़ रही है, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर एडमिशन लिया था। उन्होंने न्याय प्रणाली से जल्द से जल्द योग्य और निर्दोष छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाने की मांग की है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके और वे अपनी डिग्री प्राप्त कर सकें। छात्रों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।






