बंद बड़ी टेलीकॉम फैक्ट्री की 70 एकड़ जमीन पर लगे जंगल को बचाने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल

सामाजिक संगठन की ओर से एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है जिसमें जमीन की बिक्री रोकने और उसमें लगे 20 हजार पेड़ों को कटने से बचाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि शहर के बीचों बीच इतने सारे पेड़ शहर के लिए ऑक्सीजन टैंक से कम नहीं है लिहाजा इन्हें बचाया जाए।
बंद बड़ी टेलीकॉम फैक्ट्री की 70 एकड़ जमीन पर लगे जंगल को बचाने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल

High Court

Jabalpur News : जबलपुर में बंद हो चुकी टेलीकॉम फैक्ट्री की 70 एकड़ जमीन पर लगे जंगल को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरु हो गई है। जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मंच ने जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें शहर के बीचों बीच स्थित 20 हजार पेड़ों वाले जंगल को बचाने की मांग की गई है।

BSNL ने फैक्ट्री की जमीन बेचने के लिए निकाली है निविदा 

दरअसल जबलपुर शहर के रानीताल इलाके में बीएसएनएल की टेलीकॉम फैक्ट्री संचालित होती थी जो अब बंद हो चुकी है और बीएसएनएल ने इस जमीन को बेचने की निविदा निकाल दी है। फैक्ट्री की 70 में से 26 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने दी थी लिहाजा जमीन को वापि लेने का आदेश देते हुए सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

फैक्ट्री में मौजूद 20 हजार पेड़ों को बचाने हाई कोर्ट में याचिका  

कोर्ट में लंबित इसी मामले में अब शहर के सामाजिक संगठन की ओर से एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है जिसमें जमीन की बिक्री रोकने और उसमें लगे 20 हजार पेड़ों को कटने से बचाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि शहर के बीचों बीच इतने सारे पेड़ शहर के लिए ऑक्सीजन टैंक से कम नहीं है लिहाजा इन्हें बचाया जाए। हाई कोर्ट में दायर इस मामले पर आने वाले दिनों में जल्द सुनवाई हो सकती है।

.जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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