रेलवे की बड़ी लापरवाही उजागर,खाने-पानी की तलाश में मजदूर स्टेशन पर उतरे

रेलवे की बड़ी लापरवाही उजागर,खाने-पानी की तलाश में मजदूर स्टेशन पर उतरे

जबलपुर/संदीप कुमार

मुम्बई से बिहार जा रही श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन में सवार श्रमिकों ने शुक्रवार को मदन महल स्टेशन से बाहर आने की कोशिश की। अच्छी बात ये है कि स्टेशन के बाहर खड़े कुछ लोगो के मना करने पर ये श्रमिक स्टेशन की दीवार को नही फांद पाए। इधर इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्टेशन पर न ही जीआरपी तैनात थी और न ही आरपीएफ। बताया जा रहा है कि ट्रेन में सवार श्रमिक खाने और पीने के लिए हंगामा कर रहे थे।

जानकारी के मुताबिक जैसे ही श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन मदनमहल स्टेशन पहुँची वैसे ही लोग पानी और खाने की मांग करने लगे और जब उन्हें पानी नही मिला तो वो जबरन स्टेशन के बाहर जाने लगे । स्टेशन के बाहर खड़े कुछ लोगो ने श्रमिको को दिलासा दिया कि जबलपुर मुख्य स्टेशन में उनके लिए खाने पीने की व्यवस्था की गई है। इधर इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जीआरपी और आरपीएफ की लापरवाही मानी जा रही है। गौर करने वाली बात ये है कि अगर ये श्रमिक स्टेशन से बाहर आ जाते तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता था।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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