सेवादल कार्यकर्ता की मौत पर बवाल, मेडिकल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

सेवादल कार्यकर्ता की मौत पर बवाल, मेडिकल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

जबलपुर, संदीप कुमार| कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर लगातार बरती जा रही मेडिकल प्रबंधन की लापरवाही का शिकार अब कांग्रेस सेवादल के एक कार्यकर्ता हुए है | जिनकी गुरुवार की सुबह ईलाज के दौरान मौत हो गई। अपने कार्यकर्ता की मौत से आक्रोशित सेवादल के कार्यकर्ताओं ने आज मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपकर मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाए अन्यथा सेवादल उग्र आंदोलन करेगा|

तीन दिन पहले इम्तेयाज हुसैन को इलाज के लिए मेडिकल कालेज में भर्ती किया गया था | बताया जा रहा है कि सेवादल कार्यकर्ता इम्तेयाज हुसैन को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी उनका गला भी सूख रहा था जिसके चलते उन्हें मेडिकल कालेज में भर्ती किया गया था।मेडिकल की खराब व्यबस्था से नाराज इम्तेयाज हुसैन ने अपना एक वीडियो भी बनाकर वायरल किया था इसके बाद भी मेडिकल प्रबंधन ने उनके ईलाज में रुचि नही दिखाई|

परिवार वालो की राज्य सरकार करे मदद….
जबलपुर सेवादल के कार्यकर्ताओं ने आज राज्य सरकार के नाम एक ज्ञापन सौपकर मांग की है कि न सिर्फ दोषी मेडिकल प्रबंधन पर कार्यवाही हो बल्कि पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से उचित मुआवजा भी दिया जाए।साथी कार्यकर्ताओ का आरोप है कि शुरू से ही उनके ईलाज में लापरवाही बरती जा रही थी इतना ही नही मेडिकल कालेज के डीन को भी जब इसकी सूचना दी गई तो उनका फ़ोन बंन्द था लिहाजा आखिर उनकी मौत हो गई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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