पीएफआई मामले में विवेक तंखा ने जांच एजेंसी पर खड़े किए सवाल

पीएफआई मामले में विवेक तंखा ने जांच एजेंसी पर खड़े किए सवाल

जबलपुर। संदीप कुमार। देश में सीएए को लेकर दंगा फैलाने वाली पार्टी पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को जो फंडिंग की जा रही है, वो पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल कर रहे है….कुछ इस तरह की खबरें सोशल मीडिया में चल रही है, जिस पर राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कटाक्ष किया है। जबलपुर में मंगलवार को पशु एम्बुलेंस का लोकार्पण करने पहुँचे राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा कि अगर पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को कपिल सिब्बल रुपए दे रहे है तो इसकी जानकारी उन्हें नही है।

जांच एजेंसी पर सवाल खड़े करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि कपिल सिब्बल क्यों फंडिंग करेंगे, उन्हें किसी चीज की कमी नही है। फिर भी अगर उन्होंने फंडिंग की है तो इसमें कोई बड़ी बात नही है। पीएफआई मामले में पत्रकारों के सवालों में उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि मुझे नही मालूम पीएफआई प्रतिबंधित संगठन है। साथ ही उन्होंने जांच एजेंसी पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि वो कौन होती है, कपिल सिब्बल को पीएफआई के साथ जोडऩे वाली। एंजेसी का काम होता है जांच करने का, वो जांच करे किसी पर उंगली न उठाएं। इधर जबलपुर में हुए उपद्रव को लेकर विवेक तंखा ने कहा कि जो हुआ वह बहुत ही गलत हुआ है, क्योंकि हमारा भारत शांति का देश है। ऐसे में शांति होना चाहिए न कि अशांति। इधर दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर राज्यसभा सांसद ने कहा कि वहाँ का चुनाव बहुत ही रोमांचक है, क्योंकि तीन पार्टी के बीच वहाँ पर चुनाव है। हांलाकि शाहीनबाग में चल रहे धरने को विधानसभा चुनाव से राज्यसभा सांसद नही देख रहे है। उनका कहना है कि दिल्ली चुनाव लोकल मुद्दों पर लड़ा जाता है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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