पति की मौत के सदमे में पत्नी ने वाटर हीटर रॉड को पकड़ा, बचाने आये बेटे को भी लगा करंट

पति की मौत के सदमे में पत्नी ने वाटर हीटर रॉड को पकड़ा, बचाने आये बेटे को भी लगा करंट

जबलपुर, संदीप कुमार| जबलपुर (Jabalpur) शहर के कैंट थाना स्थित मुर्गी मैदान में बीते दिनों नगर निगम के प्यून की हत्या कर दी गई थी, हत्यारो को पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है| हत्या के बाद जब पत्नी ने अपने पति की खून में लथपथ लाश देखी तो उसने अपना होश खो दिया था, पति की मौत के बाद पत्नी और उसका पूरा परिवार टूट चुका था। रविवार की रात मृतक के घर में ऐसी घटना हुई जिससे सबके रोंगटे खड़े हो गए|

दरअसल मृतक की पत्नी ने गरम पानी की रॉड पकड़ ली जिससे करंट के झटका लगा| मां को बचाने का बेटे ने प्रयास किया तो वह भी करंट से झुलस गया| जिसके बाद माँ-बेटे को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया | कैंट पुलिस को शुक्रवार की सुबह सूचना मिली थी कि मुर्गी मैदान में एक युवक खून से लथपथ पड़ा हुआ है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जिसमें पता चला कि मृतक व्यक्ति घमापुर निवासी अरविंद सिंह राजपूत है, जो नगर निगम के अधारताल जोन क्रमांक 7 में पदस्थ था,मृतक अरविंद शराब पीने का आदि था और अपने साथियों के साथ गुरुवार की रात भी शराब पीने गया था|

पुलिस की पूछताछ जारी
सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच के लिए साइबर, क्राइम और थाना पुलिस लगी हुई है। मृतक व्यक्ति के साथियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। लेकिन वह थाने में नहीं आए हैं। वहीं मोबाइल की काल डिटेल भी निकाली जा रही है, जिसके आधार पर कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। इसी सुराग के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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