दुबई में फंसे झारखंड के 14 मजदूरों के वायरल वीडियो पर NHRC का कड़ा रुख, राज्य सरकार से दो हफ्ते में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

दुबई में करीब तीन महीने से फंसे झारखंड के 14 मजदूरों द्वारा सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
Jharkhand News

नई दिल्ली: दुबई में नौकरी के नाम पर शोषण का शिकार हुए झारखंड के 14 मजदूरों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। मजदूरों के सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। इस संबंध में NHRC ने झारखंड के मुख्य सचिव और स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स कंट्रोल रूम (MWCR) के प्रमुख को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उन खबरों के बाद हुई है, जिनमें बताया गया था कि झारखंड के बोकारो, गिरिडीह और हजारीबाग जिलों के 14 मजदूर दुबई में फंसे हुए हैं।

क्या हैं मजदूरों के गंभीर आरोप?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन मजदूरों को करीब तीन महीने पहले दुबई की एक कंपनी ‘ईएमसी’ ने ट्रांसमिशन लाइन में काम करने के लिए भेजा था। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी ने न केवल पिछले तीन महीनों से उनका वेतन नहीं दिया, बल्कि भारत वापसी को रोकने के लिए उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए हैं।

फंसे हुए एक मजदूर ने फोन पर बताया कि हालात इतने खराब हैं कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हैं। कंपनी उन पर जबरन ओवरटाइम करने का दबाव बना रही है। यही नहीं, भारत से दुबई लाने के हवाई टिकट और रहने का खर्च भी उनकी मजदूरी से काटा जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो गई है। इसी मजबूरी के चलते उन्होंने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई।

मानवाधिकारों का उल्लंघन मान रहा आयोग

NHRC ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि अगर मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का स्पष्ट मामला है। किसी भी कर्मचारी का पासपोर्ट जब्त करना और उसे वेतन से वंचित रखना गैर-कानूनी है। आयोग ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि उसके नागरिक दूसरे देशों में सुरक्षित कामकाजी माहौल में रहें।

यह मामला खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासी मजदूरों के शोषण की पुरानी समस्या को एक बार फिर उजागर करता है। पहले भी भर्ती एजेंसियों द्वारा पासपोर्ट जब्त करने, वेतन न देने और बंधुआ जैसे हालातों में काम कराने के कई मामले सामने आ चुके हैं। झारखंड उन राज्यों में से है, जहां से बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार के लिए विदेश जाते हैं, इसीलिए राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जिसे अब इस मामले में जवाब देना होगा।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

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