कांग्रेस ने कर्नाटक में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज की है। दरअसल राज्य में कांग्रेस सरकार में भी फेरबदल कर रही है। इसी क्रम में कांग्रेस ने बुधवार को बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस ने डीके शिवकुमार को सिद्धारमैया की जगह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपने के बाद, प्रदेश संगठन में एक नया चेहरा लाने का निर्णय लिया है।
दरअसल बीके हरिप्रसाद को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में रहते हुए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। वर्तमान में हरिप्रसाद कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य हैं। हालांकि, उनका कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने वाला है। राजनीतिक गलियारों में हरिप्रसाद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक मुखर आलोचक माना जाता है। वह इससे पहले राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
जानिए कौन है हरिप्रसाद?
हरिप्रसाद का जन्म 29 जुलाई 1954 को हुआ था। वह अन्य पिछड़ा वर्ग के बिलावा समुदाय से संबंध रखते हैं। कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले पूर्व नेताओं में जनार्दन पुजारी और एस बंगारप्पा भी शामिल हैं, जो इसी बिलावा समुदाय से संबंध रखते थे। यह दर्शाता है कि पार्टी ने समुदाय के प्रतिनिधित्व को महत्व दिया है।
राज्यसभा में उपसभापति पद के उम्मीदवार भी रहे
दरअसल अपने राजनीतिक जीवन में हरिप्रसाद ने कई चुनावों में अपनी किस्मत आजमाई है। वह एक बार राज्यसभा में उपसभापति पद के उम्मीदवार भी रहे थे। उन्होंने विपक्ष की ओर से इस प्रतिष्ठित पद के लिए चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह से हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 1999 में उन्होंने बंगलुरु दक्षिण सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली थी। उन्हें तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अनंत कुमार ने पराजित किया था।
वहीं इससे पहले, डीके शिवकुमार पिछले छह वर्षों से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्होंने 2 जुलाई 2020 को इस महत्वपूर्ण पद की कमान संभाली थी। शिवकुमार ने ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रदेश अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था, जब राज्य में कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति संतोषजनक नहीं थी। यह कोरोना महामारी का भी समय था, जिससे राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित थीं। उन पर अवैध मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियां उनकी जांच कर रही थीं। इन जांचों और जेल से लौटने के बाद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद, हरिप्रसाद को यह नई भूमिका मिली है।






