
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में बहने वाली दतला नदी पर लंबे समय से धड़ल्ले से अवैध रेत का कारोबार चल रहा था। अब कलेक्टर और एसपी के बहुत कड़े निर्देश मिलने के बाद प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है और रेत माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ बड़ी कार्रवाइयां शुरू कर दी गई हैं।
टीम ने लगातार दूसरे दिन रास्ते किए बंद
अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है और इसका असर जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी सिलसिले में प्रशासनिक टीमों ने कड़ा कदम उठाया है। खनिज विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने लगातार दूसरे दिन दतला नदी के अवैध घाटों पर भारी-भरकम जेसीबी मशीन चलवाई। जेसीबी से नदी की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह से खोदकर बंद कर दिया गया है।
दतला, सगवा और लालपुर समेत कई गांवों के घाटों पर की गई सख्त कार्रवाई


प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में कई ग्रामीण इलाके आए हैं, जहां अवैध रेत का काला कारोबार सबसे ज्यादा फल-फूल रहा था। सोमवार को सहायक जिला खनिज अधिकारी कमल परस्ते और चौकी प्रभारी अनिल पांडे के नेतृत्व में टीम ने दतला, सगवा, लालपुर और दशरमन गांव के पास चल रहे अवैध रेत घाटों पर पहुंचकर रास्ते पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिए।
रविवार को भी अफसरों ने की थी रेड
इससे ठीक एक दिन पहले यानी रविवार को भी बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ने इसी इलाके में मोर्चा संभाला था और तगड़ी कार्रवाई की थी। एडिशनल एसपी कमल मौर्य, जिला खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित और अन्य थानों के प्रभारियों ने मिलकर दतला नदी के घाटों पर जेसीबी चलवाई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीस किलोमीटर के पूरे इलाके में एक दर्जन अवैध घाटों से करोड़ों की रेत चोरी की गई है।
अवैध गड्ढे में डूबने से हो चुकी है मासूम बच्चे की मौत
इस अवैध उत्खनन की वजह से इलाके के लोगों में बहुत ज्यादा गुस्सा और डर का माहौल बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत एक परिवार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। लालपुर गांव के लोगों ने बताया कि अवैध खनन के कारण नदी में बहुत गहरे गड्ढे बन गए थे, जिनमें डूबने से गांव के एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों से पैसों की वसूली की मांग
बच्चे की मौत के बाद से ग्रामीणों का दर्द छलक आया है और उन्होंने अब सरकार व प्रशासन के सामने बहुत सख्त मांगे रखी हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि नदी से रेत चुराकर राजस्व का भारी नुकसान करने वालों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, इस लापरवाही में शामिल अफसरों और दोषियों से पैसों की पूरी वसूली की जाए।

