खाद्य विभाग ने 250 से अधिक चावल की बोरियां जब्त की,गोडाउन सील

खाद्य विभाग ने 250 से अधिक चावल की बोरियां जब्त की,गोडाउन सील

खंडवा/सुशील विधानी

खंडवा में राशन का कुशासन थम नहीं पा रहा है। तमाम कार्रवाई के बावजूद भी राशन की कालाबाजारी धड़ल्ले के साथ हो रही है। खंडवा शहर में ही राशन के गेहूं और चावल के ट्रक कई दफा पकड़े जा चुके हैं।

खंडवा जिला सरकारी अनाज हेराफेरी करने के मामले में सबसे आगे हैं क्योंकि जिला प्रशासन कार्रवाई तो करता है लेकिन कुछ दिन बाद माफिया फिर से सक्रिय हो जाता है। जिले में सरकारी गेहूं चावल बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों में सप्लाई हो रहा है। कार्रवाई के नाम पर विभाग के अधिकारी केवल कागजी पूर्ति करते हैं जिसका नतीजा होता है माफिया का फिर से सक्रिय होना। पहले भी कई बार गेहूं माफिया जो कि सरकारी पीडीएफ का अनाज बड़े पैमाने पर सप्लाई करता था उस पर कार्रवाई हुई थी। लेकिन कार्रवाई को ज्यादा समय बीता ही नहीं उससे पहले मुंदी रोड पर सोनी गोडाउन पर मुखबिर की सूचना पर दबिश देने तक अनाज माफिया का राज फिर से खुल गया। यहां ढाई सौ से अधिक चावल की बोरियां पकड़ी गई है। खाद्य विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने पहुंचे, बीके शुक्ला ने बताया कि गोडाउन को सील किया गया है। सोनी वेयर हाउस के नाम से गोडाउन है किसी सोनी व्यक्ति संचालित कर रहा है दो सौ से ढाई सौ बोरी चावल की मिली है। इसकी जांच की जा रही है कि चावल कहां से आया है और किस व्यक्ति का है तथा इस गोडाउन में क्यों रखा था। फिलहाल गोडाउन को सील कर दिया गया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews