कंपनी को घाटा होने पर शहर से पकड़ा नकली माल बनाने और बेचने वाला गिरोह

कंपनी को घाटा होने पर शहर से पकड़ा नकली माल बनाने और बेचने वाला गिरोह

खंडवा, सुशील विधानी| आज खंडवा जिले (Khandwa District) में बड़ा मामला सामने आया है| मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है जहां ब्रांडेड कंपनी निशा हीना मेहन्दी (Nisha Hina Mehndi) डुप्लीकेट नकली माल बनाकर बेच रहा था| लगातार पूरे देश में ब्रांडेड कंपनी हिना निशा हिना मेहंदी के कर्मचारियों को खंडवा में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था|

कंपनी के कर्मचारी द्वारा जब इसकी तहकीकात की गई तो मामला इस प्रकार निकला की कहारवाडी क्षेत्र में श्रृंगार नमक दुकानदार द्वारा लाखों रुपए का माल फर्जी तरीके से बेचा जा रहा था जो की डुप्लीकेट बनाया गया था| मेहंदी कंपनी के कर्मचारी द्वारा लगातार उस दुकान पर जाकर तहकीकात की गई और माल खरीदा गया जब माल खरीदा गया तो उसमें पूरा माल नकली पाया गया| इसकी शिकायत तुरंत सिटी कोतवाली थाना पुलिस को की गई|

मामले को गंभीरता से लेते हुए टी आई बनवारी मंडलोई ने तुरंत कॉपी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और माल जप्त किया वही दुकानदार ने बताया कि नकली माल को यदि व्यक्ति यूज़ करता तो इससे बाल भी झड़ जाते और फुंसियां हो जाती केमिकल से बनाया हुआ था इसको यूज़ करने से व्यक्ति की मौत भी हो जाती|

सिंगार कटलरी दुकान से 2250 पाउच जप्त किए हैं नकली
ब्रांडेड कंपनी निशा हीना मेहन्दी कलर के कर्मचारियों ने पकड़ाए नकली निशा महेदी के पैकेट शहर के कहारवाड़ी में एक ऋंगार नाम की दुकान में बिक रहा था| नकली हेयर कलर कंपनी और कोतवाली पुलिस ने छापामार करवाई कर पकड़े हजारों पाउच, एक आरोपी को मौके से हिरासत में लिया गया है, कोतवाली थाने में कॉपीराइट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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