आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को क्यों बनाया जाता है भीड़ का हिस्सा

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को क्यों बनाया जाता है भीड़ का हिस्सा

खंडवा, सुशील विधानी| प्रशासन व महिला बाल विकास विभाग किसी भी प्रकार का आयोजन हो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं को ही भीड़ का हिस्सा बनाया जाता है। आयोजन को सफल बनाने के लिए, यह प्रथा चली आ रही है वह अभी भी कायम है। किसान कल्याण निधि के कार्यक्रम मे महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा भीड़ इकट्ठा करने के नाम पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बुलाया और निर्वाचन की मीटिंग के नाम से बुलाकर उन्हें भूखे प्यासे बैठे रहने के दौरान दूसरे लोगों को भोजन के पैकेट बांटना शुरू किए, जिससे हंगामें की स्थिति बनी। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनके खाने पीने की व्यवस्था भी यही होगी,लेकिन जब खाना नहीं मिला तो इन महिलाओं ने कार्यक्रम की पोल खोल दी।

यह बात आरोप लगाते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिता कुलहारे ने कही। उन्होंने बताया कि किसान कम संख्या में पहुंचे लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बड़ी संख्या में नजर आई। इन्हें 12 बजे मीटिंग के नाम पर खंडवा बुलाया गया था। दोपहर 3.30 बजे कार्यक्रम खत्म हुआ। इसके बाद जब भोजन के पैकेट बंटे तो इनके हिस्से कुछ
नहीं आया। इसके बाद इन्होंने मौके पर ही हंगामा किया और अपनी पीड़ा जाहिर की। हमें कलेक्टर साहब के कहने पर निर्वाचन की मीटिंग के नाम पर बुलाया गया था और इस कार्यक्रम में बैठा दिया। यहां किसानों से ज्यादा महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। पूरी कुर्सियों पर महिलाओं की भीड़ ही नजर आ रही थी।

इनका कहना…
सरकारी कार्यक्रमों में सरकारी तंत्र तो एकत्रित होता ही है। लेकिन, खाने को लेकर अगर कोई मुद्दा है तो हम दिखवाएंगे।
-शंकरलाल सिंगाड़े अपर कलेक्टर खंडवा

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