भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड का 337 टन कचरा जलकर खाक, पीथमपुर में वैज्ञानिक विधि से हुआ नष्ट

जहरीले कचरे का निपटान मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में किया गया। स्थानीय विरोध और पर्यावरण संबंधी चिंताएं थीं..लेकिन पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बताया गया है। अब अतिरिक्त 19 टन मिट्टी में मिला कचरा और 2.22 टन पैकेजिंग वेस्ट को भी 3 जुलाई तक नष्ट किया जाएगा। 
Union Carbide Waste

भोपाल गैस त्रासदी के चालीस साल बाद पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन जहरीले कचरे को जलाकर नष्ट कर दिया गया है। इस काम को मध्य प्रदेश सरकार और पर्यावरण विभाग की कड़ी निगरानी में किया गया। इस साल की शुरुआत में 30 टन कचरे को परीक्षण के लिए जलाया गया था और फिर मई से जून तक बाकी 307 टन कचरा पूरी तरह जला दिया गया।

बता दें कि 1984 में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनेट लीक हुई थी। इस हादसे में हजारों लोग मारे गए थे और लाखों प्रभावित हुए थे। ये दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी कही जाती है। इसके बाद कारखाने में बचा जहरीला कचरा नष्ट करना सालों तक बड़ी चुनौती बनी रही।

कचरे को कैसे जलाया गया

चार दशक पुराने भोपाल गैस कांड के जख्म अब तक पूरी तरह नहीं भरे हैं। लेकिन इसका कचरा अब पूरी तरह नष्ट हो गया है। धार जिले के पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड के अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से निकला 337 टन जहरीला कचरा अब पूरी तरह से जलकर नष्ट कर दिया गया है।

जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर पीथमपुर में इस कचरे को जलाया। इस साल के शुरुआत में पहले 30 टन कचरे का परीक्षण किया गया था। इसके बाद बचे हुए 307 टन कचरे को 5 मई से 30 जून तक जलाया गया। इसे हर घंटे 270 किलो की रफ्तार से जलाया गया। इस दौरान प्रदूषण पर नजर रखने के लिए ऑनलाइन और मैनुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी पूरी निगरानी की।

अतिरिक्त कचरा भी दो दिन में जलाया जाएगा

इस कचरे जलाने के बाद जो राख बची है उसे सुरक्षित जगह पर रखा गया है। इसके लिए एक खास लैंडफिल बनाया जा रहा है जो दो महीने में तैयार हो जाएगा। यह लैंडफिल बारिश के पानी से भी सुरक्षित रहेगा। अब अतिरिक्त 19 टन मिट्टी में मिला कचरा और 2.22 टन पैकेजिंग वेस्ट को भी 3 जुलाई तक नष्ट किया जाएगा।

स्थानीय लोगों के विरोध के बीच हुआ कचरे का निपटान

जब कचरे को पीथमपुर लाया गया तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। कुछ लोग धरने पर बैठे और आत्मदाह की धमकी दी। कांग्रेस ने भी इसे लेकर लगातार विरोध किया। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम के साथ यह काम पूरा हुआ। 337 टन जहरीले कचरे का वैज्ञानिक निपटान बड़ी तकनीकी सफलता मानी जा रही है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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