पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की घोषणा ‘पीपी सर के जन्मदिन पर दिया जाएगा राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार’

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की घोषणा ‘पीपी सर के जन्मदिन पर दिया जाएगा राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार’

National level award will be given in memory of PP Sir : गांधी भवन में स्वर्गीय पुष्पेन्द्र पाल सिंह (पीपी सर) की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सामाजिक नागरिक संस्थानों, संगठनों द्वारा आयोजित स्मृति सभा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार दिया जाएगा। यहां वरिष्ठ साहित्यकार विजय बहादुर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल, आनंद प्रधान सहित सहित कई लोग शामिल हुए।

राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार देने की घोषणा

गांधी भवन में छात्र छात्राओं और सामाजिक-नागरिक संस्थाओं संगठनों और मित्रगणों द्वारा सामूहिक स्मृति सभा का आयोजन किया गया। स्मृति सभा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यहां बोलते हुए उन्होने पीपी सर के जन्मदिन पर राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार देने पर सहमति दी। उन्होंने कहा कि ‘पीपी जी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में हजारों पत्रकारो को जन्म दिया। मेरा सौभाग्य था जब मैं मुख्यमंत्री था तो उनके साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों को बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वो क्लास रूम के बाहर भी छात्रों को ज्ञान देते थे। पत्रकारिता के मूल्यों को बनाये रखने के लिए, संस्कृति को ताकत देने के लिए, उनको जोड़ने के लिए पीपी जी ने क्या नहीं किया। इतनी विविधता में भी पीपी जी लगे रहे, हमारे मूल्यों के रक्षक पीपी जी थे। वो हमारे समाज के लिए एक उदाहरण थे।’

‘पुष्पेंद्र की यादों को भूला पाना मुश्किल’

राजेश बादल ने संबोधन में कहा कि पुष्पेन्द्र सिंह जी को देश भर के विश्वविद्यालय में चाहने वाले लोग थे कई पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अधिकतर शिक्षक भी उनके शिष्य रहें पीपी सर के स्वभाव से कम बहुत सारे लोग प्रभावित थे उनकी यादों को भूला पाना बहुत मुश्किल है। रहे। कमल दीक्षित, मैडम उप्पल, पुष्पेंद्र पाल सिंह हमेशा साथ रहे। पुष्पेंद्र पाल पता नहीं कब पीपी सर बन गए। उन्होंने कई हीरे तराशे है।

‘एक जैविक शिक्षक थे पुष्पेंद्र’

आनंद प्रधान ने संबोधन में कहा कि पुष्पेन्द्र सिंह जी से मेरा परिचय उनकी शिक्षा के दौरान बनारस विश्वविद्यालय में हुआ था। विश्वविद्यालय में मुलाकात की यादें रहीं पुष्पेन्द्र सिंह जी एक जैविक शिक्षक थे जो जमीन से जुड़े थे। ज़मीन पर ही उन्होंने अपना विस्तार किया। पीपी सर प्रतिबद्धता और लगाव के साथ छात्र छात्राओं के साथ रहते थे, उनके संबंध कक्षा से लेकर बाहरी जीवन में भी रहता था। उन्होने कहा कि ‘पुष्पेंद्र जी एक शिक्षक थे, उन्हें शिक्षक ही होना था। उनमें अलग तरह का जुनून प्रतिबंधता थी। एक आध्यपक को सिर्फ क्लास रूम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रामरी के आध्यपक उंगली पकड़ कर चलना सीखते थे। कॉलेज में ये बहुत ही कम देखने को मिलता है। शिक्षक को अपने अंदर झांकना चाहिए कैसे विद्यार्थियों को बनाया जाए। विश्वविद्यालय शिक्षक और विद्यार्थी के कारण जाना जाता है। एक अच्छा शिक्षक क्लास रूम के बाहर अपने विद्यार्थियों को बनाता और बेहतर करता है। वो शिक्षक अपने विद्यार्थी में जिंदा रहेगा।’

‘पुष्पेंद्र जी होते नहीं थे, दिखते थे’

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विजय बहादुर सिंह जी ने कहा कि पुष्पेन्द्र सिंह मरे नहीं परिस्थितियों ऐसी बनाई कि इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं था। अब बहुत मुश्किल हो गया है ऐसे शिक्षकों का होना जो स्वयं में एक संस्था हो। शिक्षण संस्थान टेबल और कुर्सी से नहीं पहचानी जाती शिक्षकों से पहचानी जाती हैं। अपने शिष्यों के बीच व्याप्त थे उन्हीं के बीच जीते थे और जीना सिखाते हैं। पुष्पेन्द्र दिखते नहीं थे लेकिन रहते थे, देर रात तक निष्ठा के साथ कार्य करते रहते थे। पुष्पेन्द्र सिंह जैसे अध्यापकों का रहना एक आशा एक उम्मीद की तरह था।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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