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16 साल बाद फर्जी एनकाउंटर का पर्दाफाश हुआ, बंशी गुर्जर को पहले मरा बताया, फिर जिंदा पकड़ा, CBI ने DSP और सिपाही को दबोचा

Written by:Ronak Namdev
Published:
नीमच के 16 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर केस में CBI का बड़ा एक्शन देखने को मिला है। DSP ग्लैडविन एडवर्ड और सिपाही नीरज प्रधान को गिरफ्तार किया गया है। 2009 में तस्कर बंशी गुर्जर को मारा गया बताया था, लेकिन 2012 में जिंदा पकड़ा गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर जांच की गई जिसमें इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ है।
16 साल बाद फर्जी एनकाउंटर का पर्दाफाश हुआ, बंशी गुर्जर को पहले मरा बताया, फिर जिंदा पकड़ा, CBI ने DSP और सिपाही को दबोचा

नीमच में 16 साल पहले हुए एक फर्जी एनकाउंटर की गुत्थी अब सुलझती नजर आ रही है। CBI ने इस सनसनीखेज मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए DSP ग्लैडविन एडवर्ड कार और प्रधान आरक्षक नीरज प्रधान को गिरफ्तार किया है। दोनों ने 2009 में कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर को मुठभेड़ में ढेर करने की कहानी गढ़ी थी, लेकिन सच तब सामने आया जब 2012 में उज्जैन पुलिस ने उसे जिंदा पकड़ लिया। हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने जांच शुरू की, जिसमें पता चला कि पुलिस ने झूठी कहानी रची थी।

मंगलवार को तीन घंटे की पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया। उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं, और अब इस मामले में अन्य पुलिसकर्मियों पर भी शिकंजा कस सकता है।

CBI की जांच में खुला फर्जी एनकाउंटर का राज

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद CBI ने इस मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि 7 फरवरी 2009 को नीमच पुलिस ने बंशी गुर्जर को एनकाउंटर में मारने का दावा किया था, लेकिन यह पूरी तरह झूठ था। 20 दिसंबर 2012 को उज्जैन के दानीगेट इलाके से बंशी जिंदा पकड़ा गया। CBI ने पाया कि इस फर्जी मुठभेड़ में DSP ग्लैडविन और सिपाही नीरज अहम किरदार थे। दोनों को बयान के लिए बुलाया गया, लेकिन पूछताछ में उनके जवाब संतोषजनक नहीं मिले। अब CBI इस केस में शामिल अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसमें एक ASP को भी नोटिस भेजा गया है।

मरा समझा गया तस्कर जो जिंदा निकला

बंशी गुर्जर नीमच के मनासा तहसील का कुख्यात तस्कर है, जिसकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। 4 फरवरी 2009 को उसने राजस्थान पुलिस पर हमला कर अपने साथी को छुड़ाया था। इसके ठीक तीन दिन बाद नीमच पुलिस ने उसे एनकाउंटर में मारने का दावा किया। लेकिन 2012 में उज्जैन पुलिस ने उसे जिंदा पकड़कर सबको हैरान कर दिया। बंशी के साथी घनश्याम धाकड़ ने खुलासा किया कि वह फरारी के दौरान जिंदा था। इस सनसनीखेज सच के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई, जिसके बाद CBI ने जांच शुरू की। अब 16 साल बाद इस फर्जी एनकाउंटर का सच सामने आने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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