पूर्व सीएम के गृहनगर में लचर स्वास्थ्य सेवा, डॉक्टर को तरस रहा शासकीय अस्पताल

पूर्व सीएम के गृहनगर में लचर स्वास्थ्य सेवा, डॉक्टर को तरस रहा शासकीय अस्पताल

गुना/ विजय जोगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गृह नगर राघोगड़ से कुछ ही दूरी पर स्थित विजयपुर शासकीय अस्पताल में पिछले 4 साल से कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते यहां के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल द्वारा एक ड्रेसर और लैब टेक्नीशियन यहां पर पदस्थ किए गए हैं और साथ ही एक डॉक्टर को भी विजयपुर अस्पताल में पदस्थ किया गया था। लेकिन डॉक्टर ने अपना अटैचमेंट बीनागंज शासकीय अस्पताल करा रखा है। डॉक्टर ना होने के चलते पिछले 4 सालों से विजयपुर में रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इलाज समय पर ना मिलने से कई लोगों ने अपनी जान भी गवाही है।

विजयपुर शासकीय अस्पताल में पदस्थ डॉ अमित श्रीवास्तव 4 साल से अधिक समय से बीनागंज में पदस्थ हैं जबकि जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने इस मामले में अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। विजयपुर में रोजाना एक सैकड़ा से अधिक लोग इलाज कराने अस्पताल में पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर ना होने की स्थिति में मरीजों को विजयपुर से 30 किलोमीटर दूर गुना जिला अस्पताल जाना पड़ता है। अगर विजयपुर में समय रहते हैं डॉक्टर नहीं आए तो आने वाले समय में यहां के लोगों को भारी से भारी परेशानी हो सकती है। ऐसे भी कोरोना काल में यहां लोगों को कई बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में डॉक्टर के ना होने से यहां के मरीजों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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